प्रधानी चुनाव रंजिश में हत्या: 16 साल बाद 18 दोषियों को उम्रकैद, फतेहपुर कोर्ट का फैसला

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Mridul Kumar Tiwari
Mridul Kumar Tiwari is the Editor-in-Chief of News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to credible, independent, and public-interest journalism. He oversees editorial operations, newsroom standards,...
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फतेहपुर कोर्ट ने 16 साल पुराने हत्या मामले में 18 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

प्रधानी चुनाव की रंजिश में हुई हत्या के 16 साल बाद फैसला, 18 दोषियों को उम्रकैद

फतेहपुर जनपद की खागा तहसील स्थित पट्टीशाह गांव में वर्ष 2009 में प्रधानी चुनाव की रंजिश में हुई नफीस की हत्या के मामले में आखिरकार अदालत ने 16 साल बाद अपना फैसला सुनाया। अपर जिला जज पूजा विश्वकर्मा की अदालत ने इस बहुचर्चित प्रकरण में 18 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

दिनदहाड़े हुई थी गोली मारकर हत्या

घटना 24 नवंबर 2009 की है, जब पट्टीशाह गांव में प्रधानी चुनाव की पुरानी रंजिश को लेकर नफीस की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि उस समय बसपा नेता मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां ने अपने सहयोगियों के साथ गांव के बाहर घेरेबंदी कर नफीस पर फायरिंग की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या की इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। मृतक के पिता शकील ने थाने में तहरीर देकर मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां, उनके भाई शाहिद रजा, पुत्र सलमान, सिकंदर, सीमाब नकवी समेत मोबीन, अमीन, गय्यूर, मोईन जैदी, असगर, रूकनुरउद्दीन, तेज अली, सगीर, चंद्रभूषण, रमेश चंद्र, मोहम्मद हई, बासु उर्फ फहरान और नसीम घोषी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।

साक्ष्य और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए और घटना से संबंधित साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने सभी 18 आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपियों के विरुद्ध अपराध को सिद्ध करते हैं।

सुनवाई के दौरान पांच आरोपियों की हो चुकी है मृत्यु

इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी मजहर हैदर नकवी उर्फ मज्जू मियां की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा आरोपियों में तेज अली, चंद्रभूषण, सगीर और नसीम की भी विभिन्न कारणों से मृत्यु हो चुकी है। इन पांचों के विरुद्ध कार्यवाही उनके निधन के कारण समाप्त हो गई थी।

गांव में पुरानी रंजिश का दर्द अब भी जिंदा

प्रधानी चुनाव की रंजिश से शुरू हुआ यह विवाद वर्षों तक चर्चा में रहा। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना रहा था। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने की बात कही है। वहीं क्षेत्र में फैसले को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में अदालत के निर्णय ने एक लंबी कानूनी प्रक्रिया को विराम दिया है। हालांकि यह घटना आज भी ग्रामीणों के बीच उस दौर की कटु राजनीतिक रंजिश की याद दिलाती है, जिसने एक परिवार से उसका सदस्य छीन लिया।