कानपुर में बरसात के बाद खराब हुई सड़कों को गड्ढामुक्त घोषित करने में विभागों की लापरवाही सामने आने लगी है। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों ने मिलकर शासन को यह रिपोर्ट भेज दी कि शहर की सड़कें पूरी तरह गड्ढामुक्त हो चुकी हैं, जबकि जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल उलट है। कई प्रमुख मार्ग आज भी गहरे गड्ढों से भरे हैं, जहां वाहन चलाना जोखिम भरा बना हुआ है। शासन ने अब पूरे अभियान की जांच के आदेश जारी किए हैं और इसके लिए अभियंता भी तैनात किए गए हैं।
बरसात के बाद कानपुर की सड़कों का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। रामादेवी से आईआईटी तक जीटी रोड, मैनावती मार्ग, पनकी, कल्याणपुर, बर्रा, विश्वबैंक, आवास विकास समेत कई इलाकों में गिट्टी तक उखड़ गई थी। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे। दीपावली से पहले गड्ढामुक्त अभियान चलाकर सभी सड़कों को दुरुस्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन कई जगह पैचवर्क की खानापूरी भी नहीं हुई। जहां पैचवर्क किया गया, वहां भी सड़क समतल न होने से वाहन चालकों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
30 करोड़ रुपये खर्च, फिर भी गड्ढों से राहत नहीं मिली
शासन ने 15 नवंबर तक का अंतिम समय देकर सभी विभागों से रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद विभागों ने जल्दबाजी में कागजों पर पैचवर्क पूरा दिखाकर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।
लेकिन कई प्रमुख मार्गों पर आज भी हाल बेहाल है।
पांडुनगर गुरुद्वारा रोड
शास्त्रीनगर फैक्ट्री चौराहा से नहरिया रोड
मरियमपुर से कोकाकोला चौराहा
गड़रियनपुरवा और कालपी रोड का बड़ा हिस्सा
ग्रीनपार्क से आनंदेश्वर मंदिर मार्ग
पनकी पड़ाव से कालपी रोड
लोग बताते हैं कि कई जगह तो बरसात में मिट्टी डालकर ही काम निपटा दिया गया था। एक वर्ष पहले लाखों खर्च कर बनी सड़कें भी जगह-जगह टूटी मिलीं।
पीडब्ल्यूडी की सड़कों की सबसे खराब स्थिति
पीडब्ल्यूडी द्वारा हैलट रोड पर पोस्टमार्टम हाउस से मेट्रो स्टेशन तक चार बार पैचवर्क कराया गया, लेकिन कुछ दिनों में फिर गड्ढे बन गए। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अभियंताओं और ठेकेदारों की मिलीभगत से घटिया स्तर का काम कराया गया, जिसका नतीजा अब सड़क टूटने के रूप में सामने आ रहा है।
नगर निगम की दलील
मुख्य अभियंता एसएफए जैदी का कहना है कि कई जगह दुबारा गड्ढे बन गए हैं, जिन पर दोबारा पैचवर्क कराया जा रहा है। वहीं पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने कहा है कि हैलट रोड मेट्रो निर्माण कार्य के कारण क्षतिग्रस्त हुई है और इसे अगले वित्तीय वर्ष में शामिल कर दुरुस्त किया जाएगा।
लोगों का कहना है कि कागजों में सड़कें भले ही गड्ढामुक्त दिख रही हों, लेकिन धरातल पर स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। स्थानीय नागरिकों ने शासन से कठोर कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
कानपुर में गड्ढामुक्त सड़कों की झूठी रिपोर्ट पर शासन सख्त, अब होगी जांच

कानपुर में विभागों द्वारा सड़कों को गड्ढामुक्त बताकर रिपोर्ट भेजने पर जमीनी हकीकत कुछ और मिली, अब शासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
Category: uttar pradesh kanpur civic issues
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