माघ पूर्णिमा पर काशी में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजे ‘हर हर महादेव’ के जयकारे

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काशी के घाटों पर माघ पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब और गूंजते महादेव के जयकारे

वाराणसी: अविनाशी शिव की त्रिशूल पर टिकी नगरी काशी में आज माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। कड़ाके की ठंड को मात देते हुए सूर्योदय की पहली किरण से बहुत पहले ही दशाश्वमेध से लेकर अस्सी घाट तक आस्था का रेला उमड़ पड़ा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की इस पूर्णिमा तिथि पर स्वयं देवता स्वर्ग लोक से उतरकर गंगा में स्नान करने आते हैं। इसी पावन विश्वास को हृदय में संजोए देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने माँ पतित पावनी गंगा की लहरों में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। भोर की पहली किरण के साथ ही पूरी काशी ‘हर-हर महादेव’ और ‘गंगा मैया की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी देवलोक की आभा पृथ्वी पर उतर आई हो।

गंगा के तटों पर इस बार का नजारा विहंगम रहा। कल्पवासियों, साधु-संतों और गृहस्थों की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि काशी के प्रति अटूट विश्वास आज भी अडिग है। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात विधि-विधान से घाटों पर दीपदान किया, जो अंधेरे से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि आज के दिन किया गया दान और स्नान जन्म-जन्मान्तर के पापों को धोकर मोक्ष का द्वार खोल देता है। इसी क्रम में घाटों के किनारे अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करने के लिए भी होड़ मची रही। दशाश्वमेध, पंचगंगा और राजघाट जैसे प्रमुख घाटों पर तिल रखने की भी जगह शेष नहीं थी, फिर भी श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बनती थी।

स्नान और ध्यान के इस अलौकिक अनुष्ठान के बाद भक्तों का कारवां श्री काशी विश्वनाथ धाम की ओर बढ़ चला। नव्य-भव्य विश्वनाथ धाम में बाबा के दर्शन के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन शिव के प्रति अनुराग ने भक्तों की थकान को जैसे हर लिया था। हाथ में गंगाजल और बेलपत्र लिए श्रद्धालु घंटों अपनी बारी का इंतजार करते दिखे और जैसे ही गर्भगृह में बाबा के दर्शन हुए, पूरा परिसर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए व्यापक प्रबंध किए गए थे, जिससे भारी भीड़ के बावजूद दर्शन पूजन का सिलसिला सुचारु रूप से चलता रहा। बाबा के दरबार में मत्था टेककर श्रद्धालुओं ने न केवल अपने परिवार की सुख-समृद्धि, बल्कि विश्व कल्याण की भी कामना की।

इस विशाल धार्मिक समागम को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस बल की सक्रियता भी काबिले तारीफ रही। संवेदनशील इलाकों और घाटों पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस, पीएसी और होमगार्ड के जवान मुस्तैद रहे। आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए ड्रोन कैमरों से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई, ताकि कहीं भी कोई अप्रिय स्थिति न बने। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोदौलिया से लेकर मैदागिन तक बैरिकेडिंग की गई थी। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग की टीमें और एंबुलेंस सेवाएं भी तैनात रहीं।

प्रशासन की इसी सतर्कता और बेहतर प्रबंधन के कारण लाखों की संख्या में आए श्रद्धालुओं ने बिना किसी बाधा के पर्व का आनंद लिया और पुलिस-प्रशासन की व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से सराहना की।