एसवाईएल नहर विवाद: 27 जनवरी को चंडीगढ़ में हरियाणा-पंजाब सीएम की अहम बैठक, केंद्र की निगरानी

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AI GENRETED PIC27 जनवरी को चंडीगढ़ में एसवाईएल मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बातचीत।

सतलुज यमुना लिंक नहर विवाद के समाधान की दिशा में एक बार फिर अहम पहल होने जा रही है। हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री 27 जनवरी को चंडीगढ़ में आमने सामने बैठकर बातचीत करेंगे। यह बैठक हरियाणा निवास में सुबह साढ़े नौ बजे प्रस्तावित है और केंद्र सरकार की निगरानी में हो रही इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा के पक्ष में फैसला दिए जाने के बावजूद अब तक हुई बैठकों में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, ऐसे में इस दौर की बातचीत से भी बड़ी उम्मीदें और आशंकाएं दोनों जुड़ी हुई हैं।

बैठक से एक दिन पहले 26 जनवरी की शाम छह बजे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा बैठक बुलाई है। इसमें अब तक की स्थिति रिपोर्ट पर विस्तार से मंथन किया जाएगा ताकि 27 जनवरी की बैठक में हरियाणा का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। हरियाणा सचिवालय में अवकाश के बावजूद तैयारियों को लेकर कई विभागों के अधिकारी सक्रिय नजर आए। इससे साफ है कि राज्य सरकार इस बैठक को लेकर पूरी तरह गंभीर है।

इससे पहले भी पिछले वर्ष नौ जुलाई और पांच अगस्त को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बैठक हो चुकी है, लेकिन दोनों अवसरों पर सहमति नहीं बन सकी। केंद्र सरकार के निर्देश पर एक बार फिर एसवाईएल मुद्दे पर संयुक्त बैठक बुलाई गई है, हालांकि इस बार केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अब अंतिम चरण में माना जा रहा है और अदालत ने दोनों राज्यों को केंद्र की मध्यस्थता में आपसी सहमति से हल निकालने की सलाह दी है।

एसवाईएल नहर लंबे समय से हरियाणा और पंजाब के बीच विवाद का कारण बनी हुई है। हरियाणा का तर्क है कि नहर के निर्माण से उसे उसके वैधानिक और संवैधानिक जल अधिकार मिलेंगे, जबकि पंजाब का लगातार कहना है कि उसके पास अतिरिक्त पानी उपलब्ध नहीं है। इसी टकराव के कारण वर्षों से यह मामला अटका हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों और केंद्र की कोशिशों के बावजूद समाधान नहीं निकल सका है।

हाल के महीनों में हरियाणा सरकार ने इस मुद्दे पर अपना रुख और सख्त किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हरियाणा अपने हक के पानी के लिए कानूनी और संवैधानिक लड़ाई जारी रखेगा। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी साफ संकेत दे चुके हैं कि पंजाब के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। ऐसे में 27 जनवरी की बैठक को इसलिए भी निर्णायक माना जा रहा है क्योंकि दोनों राज्य अपने अपने पक्ष पर अड़े हुए हैं और केंद्र सरकार की मौजूदगी में किसी साझा रास्ते की तलाश की जा रही है।