उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में संभावित 20% बढ़ोतरी, घरेलू और उद्योगों पर असर

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Dilip Kumar
Dilip Kumar is the Associate Editor at News Report, a registered Hindi newspaper committed to ethical, factual, and responsible journalism. He plays a key role in...
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उत्तर प्रदेश: अप्रैल से बिजली दरों में संभावित 20% वृद्धि

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले महीने भारी पड़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल की गई वार्षिक राजस्व आवश्यकता यानी एआरआर के प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। आयोग के इस कदम के बाद संकेत मिल रहे हैं कि अप्रैल से राज्य में बिजली की दरों में औसतन 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

बिजली कंपनियों ने पिछले वर्ष 28 नवंबर को आयोग के समक्ष कुल 1 लाख 18 हजार 741 करोड़ रुपये का एआरआर प्रस्ताव रखा था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिजली खरीद का है, जिस पर करीब 85 हजार 305 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के संचालन और रखरखाव पर लगभग 3 हजार 837 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कंपनियों ने सरकार से करीब 17 हजार 100 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने के बावजूद मौजूदा दरों पर 12 हजार 453 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा दिखाया है।

हालांकि कंपनियों ने एआरआर के साथ बिजली दरों में बढ़ोतरी से जुड़े टैरिफ प्रस्ताव दाखिल नहीं किए हैं, लेकिन आयोग ने अब उनसे श्रेणीवार प्रस्तावित दरों का पूरा ब्योरा मांगा है। जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव और अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को देखते हुए कंपनियों ने सीधे तौर पर दर बढ़ाने का प्रस्ताव देने से परहेज किया और यह फैसला आयोग पर छोड़ दिया। इसके बावजूद एआरआर में दर्शाए गए घाटे की भरपाई के लिए मौजूदा दरों में औसतन 20 प्रतिशत तक की वृद्धि जरूरी मानी जा रही है।

एआरआर प्रस्ताव में इस बार भी वितरण हानियां लगभग 13.07 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पहले के वर्षों के अनुरूप है। निजी क्षेत्र की नोएडा पावर कंपनी का एआरआर प्रस्ताव भी आयोग ने स्वीकार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पिछले छह वर्षों से बिजली की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार एआरआर स्वीकार होने के बाद आयोग को अधिकतम 120 दिनों के भीतर नई बिजली दरों का निर्धारण करना होता है।

आयोग ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे एआरआर से जुड़े आंकड़े तीन दिन के भीतर प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित कराएं। इसके बाद उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों को 21 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। मार्च महीने में आयोग प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों के क्षेत्रों में जाकर सार्वजनिक सुनवाई करेगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस बीच उपभोक्ता संगठनों ने प्रस्तावित बढ़ोतरी का कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने एआरआर को मनगढ़ंत आंकड़ों पर आधारित बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा, जबकि कंपनियां इसे दरों में जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। वर्मा का दावा है कि आयोग अब तक लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का उपभोक्ता सरप्लस बिजली कंपनियों पर निकाल चुका है, ऐसे में अगले पांच वर्षों तक हर साल आठ प्रतिशत दरों में कमी होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी बिजली दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया जाएगा।

अब सभी की नजरें आयोग की सुनवाई प्रक्रिया और अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि आने वाले वित्तीय वर्ष में उपभोक्ताओं की जेब पर बिजली कितनी भारी पड़ेगी।

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Dilip Kumar is the Associate Editor at News Report, a registered Hindi newspaper committed to ethical, factual, and responsible journalism. He plays a key role in editing, verifying, and shaping news content to maintain high editorial standards and accuracy. With solid experience in newsroom operations and content evaluation, Dilip Kumar works closely with reporters and editors to ensure balanced reporting, clarity of information, and adherence to journalistic ethics. His focus areas include governance, social issues, public welfare, and regional affairs.