वाराणसी: दालमंडी प्रकरण में सपा नेताओं को किया नजरबंद, पुलिस पर तानाशाही का आरोप

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Sandeep Srivastava
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वाराणसी में दालमंडी पीड़ितों से मिलने जा रहे सपा प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने घरों पर रोका।

वाराणसी में दालमंडी ध्वस्तीकरण के बाद सपा प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर सियासी हलचल

वाराणसी में पूर्वांचल की प्रमुख व्यापारिक मंडी दालमंडी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले परिवारों की परेशानियों को समझने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल को मौके पर भेजने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के बाद विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और शिक्षक एमएलसी लाल बिहारी यादव ने 11 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल नामित किया। पत्र सामने आने के बाद वाराणसी पुलिस सक्रिय हुई और कई समाजवादी पार्टी नेताओं को रात से ही उनके घरों पर रोक दिया गया। पुलिस का कहना है कि दालमंडी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश की इजाजत नहीं है।

शहर में हाउस अरेस्ट और पुलिस की कार्रवाई

दालमंडी जाने से पहले शहर के कई समाजवादी पार्टी नेताओं के आवास पर पुलिस का पहरा लगाया गया। लंका थाना क्षेत्र में पार्टी नेता सत्यप्रकाश सोनकर के घर पुलिस पहुंची। उनसे कहा गया कि दालमंडी में बिना अनुमति प्रवेश नहीं किया जा सकता है, इसलिए एहतियातन घर पर निगरानी रखी जा रही है। सत्यप्रकाश सोनकर ने इस कार्रवाई को तानाशाही रवैया बताया और कहा कि किसी के दुख दर्द को समझने के लिए जाना भी अब मुश्किल कर दिया गया है।

इसी तरह लंका पुलिस देर रात अमन यादव के घर पहुंची और उन्हें भी बाहर जाने से रोका गया। अमन यादव ने कहा कि यह कार्रवाई शासन के निर्देश पर की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार बार घरों पर पुलिस की तैनाती से सामान्य जीवन और रोजगार प्रभावित होता है।

रामनगर क्षेत्र में भी कार्रवाई

हमारे रामनगर संवाददाता राजकुमार यादव ने बताया कि गंगा पार रामनगर क्षेत्र में भी रात से कई समाजवादी पार्टी नेताओं को घरों में रोका गया। पुराने रामनगर में बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के जिला अध्यक्ष जितेंद्र यादव मलिक अधिवक्ता को उनके निजी आवास पर पुलिस की निगरानी में रखा गया। उन्होंने इसे दमनकारी नीति बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक प्रतिनिधियों को पीड़ितों से मिलने से रोकना गलत है।

सपा प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेता

राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा, जिलाध्यक्ष सुजीत यादव, प्रदेश अध्यक्ष महिला सभा रीबू श्रीवास्तव, पूर्व प्रत्याशी अशफाक अहमद डब्लू, पूर्व विधायक समद अंसारी, पूर्व प्रत्याशी पूजा यादव, पूर्व महानगर अध्यक्ष विष्णु शर्मा, पूर्व महासचिव लालू यादव और दिलशाद अहमद डिल्लू शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझना बताया गया है।

दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का कुल बजट 215 करोड़ रुपए है। इस परियोजना के तहत दालमंडी मार्ग को 17.05 मीटर तक चौड़ा किया जाना है। चौड़ीकरण की जद में कुल 181 मकान और 6 मस्जिदें आ रही हैं। लोक निर्माण विभाग अब तक करीब 20 मकानों का ध्वस्तीकरण कर चुका है। 40 से अधिक मकानों की रजिस्ट्री हो चुकी है और 30 मकानों पर ध्वस्तीकरण का काम चल रहा है। जून 2026 तक परियोजना को कार्यदायी संस्था को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।

रोजगार पर पड़ने वाला असर

सरकारी आंकड़ों के अनुसार दालमंडी क्षेत्र में लगभग 1400 दुकानें हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है और करीब दस हजार दुकानों से लगभग एक लाख लोग अपनी आजीविका चलाते हैं। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से इन परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारी और स्थानीय निवासी विकास कार्यों का समर्थन तो कर रहे हैं लेकिन चौड़ीकरण की सीमा को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।

सड़क चौड़ीकरण की रूपरेखा और मुआवजा

नई सड़क से चौक थाने तक दालमंडी मार्ग की लंबाई लगभग 650 मीटर है। इसे 60 फुट चौड़ा किया जाना प्रस्तावित है जिसमें 30 फुट सड़क और दोनों ओर 15 15 फुट की पटरी होगी। परियोजना के तहत बिजली सीवर और पानी की लाइनें भूमिगत की जाएंगी। लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार आंकड़ों के आधार पर प्रभावित मकानों के लिए लगभग 191 करोड़ रुपए के मुआवजे का आकलन किया गया है। अब तक 40 मकानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है और चरणबद्ध तरीके से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जारी है।

प्रशासन का पक्ष

पुलिस और प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था को देखते हुए दालमंडी क्षेत्र में नियंत्रित प्रवेश की व्यवस्था की गई है। बिना अनुमति किसी भी राजनीतिक या सामाजिक प्रतिनिधिमंडल को क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रशासन के अनुसार परियोजना के तहत सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार की जा रही हैं और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की कार्रवाई जारी है।