वाराणसी में मिलावट का नेटवर्क और त्योहारों के मौसम में बढ़ती शिकायतें
वाराणसी को आस्था, परंपरा और स्वाद की नगरी के रूप में पहचाना जाता है, लेकिन इन दिनों शहर और आसपास के क्षेत्रों में मिलावटी खोया, पनीर, दूध और मिठाइयों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। होली, रमजान और विवाह समारोहों के मौसम में बाजारों में मांग बढ़ने के साथ ही शुद्धता को लेकर सवाल भी तेज हुए हैं। स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि त्योहारों के दौरान अस्थायी भट्टियों और गोदामों में बड़े पैमाने पर नकली खोया और पनीर तैयार किया जाता है, जो देखने में असली जैसा लगता है लेकिन गुणवत्ता के मानकों पर खरा नहीं उतरता।
शिकायतों के अनुसार सस्ते रसायनों, सिंथेटिक दूध और निम्न स्तर के कच्चे माल से तैयार उत्पाद बाजार में खपाए जाते हैं। मांग अधिक होने और आपूर्ति पर दबाव के कारण कई व्यापारी गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ रहा है। हालांकि समय समय पर छापेमारी और सैंपलिंग की कार्रवाई की सूचनाएं मिलती रहती हैं, लेकिन आम लोगों का कहना है कि इन कार्रवाइयों का दायरा सीमित रहता है और निरंतर निगरानी का अभाव दिखाई देता है।
कार्रवाई के दावे और जमीनी स्थिति
खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित जांच और नमूना परीक्षण का दावा करता है। कई मामलों में प्रतिष्ठानों के नमूने जांच में असफल पाए जाने की सूचनाएं भी सामने आई हैं। वाराणसी और उसके आसपास हजारों डेयरी, मिठाई की दुकानें और छोटे बड़े भोजनालय संचालित हैं। इन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, स्वच्छता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर समय समय पर प्रश्न उठते रहे हैं। कुछ स्थानों पर घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की शिकायतें भी सामने आई हैं, जो नियमों का उल्लंघन होने के साथ साथ आगजनी जैसी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निगरानी तंत्र मजबूत और पारदर्शी हो तो मिलावट के मामलों में कमी लाई जा सकती है। नियमित निरीक्षण, दोषी पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई का सख्ती से पालन आवश्यक है। केवल त्योहारों के समय विशेष अभियान चलाने के बजाय साल भर निरंतर जांच व्यवस्था लागू करना अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
चिकित्सकों के अनुसार मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी दस्त, फूड प्वाइजनिंग और लीवर तथा किडनी से जुड़ी जटिलताओं का कारण बन सकता है। त्योहारों के बाद अस्पतालों में पेट के रोगों और एलर्जी के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। आम उपभोक्ता के लिए दुकान पर खड़े होकर यह पहचान पाना कठिन होता है कि उत्पाद शुद्ध है या नहीं। इसी कारण भरोसे पर आधारित खरीदारी व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।
कानूनी प्रावधान और शिकायत की प्रक्रिया
देश में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियम Food Safety and Standards Authority of India द्वारा लागू किए जाते हैं। राज्य स्तर पर खाद्य सुरक्षा विभाग निरीक्षण और नमूना जांच की जिम्मेदारी निभाता है। उत्तर प्रदेश में खाद्य मिलावट की शिकायत राज्य खाद्य सुरक्षा हेल्पलाइन 1800 180 5533 पर दर्ज कराई जा सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर हेल्पलाइन 1800 112 100 तथा फूड सेफ्टी कनेक्ट एप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
जागरूकता और जवाबदेही की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। उपभोक्ता जागरूकता, बिल लेने की आदत, लाइसेंस की जांच और संदिग्ध उत्पादों की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देना भी उतना ही जरूरी है। व्यापारिक संगठनों, स्थानीय निकायों और नागरिक समूहों को मिलकर पारदर्शिता और जवाबदेही की संस्कृति विकसित करनी होगी।
अब मिलावट के खिलाफ सख्त और निरंतर कदम उठाने की आवश्यकता है। त्योहारों की खुशियां सुरक्षित और स्वस्थ रहें, इसके लिए प्रशासनिक सख्ती, नियमित निरीक्षण और जन सहभागिता तीनों की समान भूमिका है। खाने की थाली में शुद्धता और बाजार में ईमानदारी सुनिश्चित करना केवल कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
