वाराणसी: श्री काशी विश्वनाथ धाम व मणिकर्णिका घाट पर उन्नत वायु शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित

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Pradyumn Kant Patel
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वाराणसी में 'संजीवन' पहल के तहत वायु शुद्धिकरण इकाइयां स्थापित की गईं।

वाराणसी में संजीवन पहल के तहत श्री काशी विश्वनाथ धाम और मणिकर्णिका घाट पर उन्नत वायु शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित

वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ धाम के आसपास वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की गई है। जिंदल स्टेनलेस ने संजीवन नामक परियोजना के तहत धाम परिसर के रैम्प भवन में उन्नत स्वदेशी वायु शुद्धिकरण प्रणाली स्थापित करने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। यह परियोजना ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट को भी शामिल करती है, जहां दाह संस्कार के दौरान उठने वाले धुएं और अन्य प्रदूषकों को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अनुरूप पहल

यह परियोजना पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य शहर, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ वायु सुनिश्चित करना है। संजीवन पहल को श्री काशी विश्वनाथ धाम प्राधिकरण से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

जिंदल स्टेनलेस की ओर से बताया गया कि यह अब तक की उनकी सबसे बड़ी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी परियोजनाओं में से एक है। इसे अमीदा क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लागू किया जा रहा है, जिसमें कंपनी की उन्नत परिवेशीय वायु शुद्धिकरण तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

मणिकर्णिका घाट पर प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान

परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार स्थल के निकट स्थित रैम्प भवन में विशेष वायु शोधन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य चिताओं से उठने वाले धुएं और सूक्ष्म कणों को नियंत्रित करना है, ताकि आसपास के क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।

इस पहल के अंतर्गत स्टेनलेस स्टील की 58 वायु शुद्धिकरण इकाइयां लगाई जाएंगी, जिनकी कुल क्षमता प्रति घंटे तीन लाख घन मीटर से अधिक वायु शुद्धिकरण की है। इससे मंदिर परिसर और घाट क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं, पुजारियों और स्थानीय निवासियों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

अट्रेक्ट कैप्चर एलिमिनेट तकनीक का उपयोग

परियोजना में अमीदा की अट्रेक्ट कैप्चर एलिमिनेट प्लस तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक को नीति आयोग सहित विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा परीक्षण और अनुमोदन प्राप्त है। यह प्रणाली हवा में मौजूद प्रदूषकों को आकर्षित कर उन्हें पकड़ने और निष्क्रिय करने के सिद्धांत पर कार्य करती है।

तकनीक के माध्यम से नैनो ब्लैक कार्बन, पराग कण और जैविक कणों को प्रभावी रूप से कम किया जा सकेगा। साथ ही सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों के प्रभाव को घटाने तथा वायरस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने की क्षमता भी इसमें शामिल है।

लाखों श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को लाभ

श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के मुख्य गलियारे और मणिकर्णिका घाट के आसपास वायु गुणवत्ता में सुधार से श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की अपेक्षा है। स्थानीय प्रशासन ने इस पहल को पर्यावरण सुधार और जनस्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

संजीवन पहल का उद्देश्य केवल प्रदूषण को कम करना ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल पर स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना भी है। इससे वाराणसी के प्रमुख तीर्थ क्षेत्र में दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुधार की दिशा में ठोस प्रयास माना जा रहा है।