वाराणसी: सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर घटाने को पुलिस ने शुरू की सीपीआर-प्रशिक्षण योजना

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Dilip Kumar
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जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत वाराणसी पुलिस द्वारा CPR और प्राथमिक चिकित्सा कार्यशाला

वाराणसी में सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली असमय और रोकी जा सकने वाली मौतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में यातायात पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा एक सशक्त और निर्णायक पहल की गई। जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के अंतर्गत सीपीआर और प्राथमिक चिकित्सा पर आधारित एक विशेष उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद के गोल्डन आवर में पीड़ित को समय पर जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराना है।

यह विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला दिनांक 03 फरवरी 2026 को रिजर्व पुलिस लाइन कमिश्नरेट वाराणसी में आयोजित की गई। कार्यक्रम में जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के अंतर्गत चयनित थानों से गठित क्रिटिकल कॉरिडोर टीम के पुलिस कर्मियों के साथ लगभग 800 नव नियुक्त पुलिस कैडेट्स ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यशाला का फोकस पुलिस बल को प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले के रूप में चिकित्सकीय रूप से सक्षम और आत्मविश्वासी बनाना रहा।

प्रशिक्षण सत्र में राजकीय चिकित्साधिकारी और सीपीआर विशेषज्ञ डॉ शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी ने सीपीआर की उपयोगिता और इसकी वैज्ञानिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीपीआर एक आपातकालीन जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग उस स्थिति में किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस रुक जाती है या हृदय की धड़कन बंद हो जाती है। छाती पर नियंत्रित दबाव देकर रक्त संचार को अस्थायी रूप से चालू रखा जाता है, जिससे मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचता रहता है।

डॉ द्विवेदी ने बताया कि हृदय रुकने के बाद पहले पांच से दस मिनट अत्यंत निर्णायक होते हैं। यदि इस अवधि में सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रशिक्षण के दौरान सीपीआर प्रक्रिया का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें चेस्ट कंप्रेशन, श्वसन मार्ग को खुला रखने की विधि, बेहोश व्यक्ति की स्थिति का आकलन और आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने का अभ्यास कराया गया।

कार्यशाला में प्राथमिक चिकित्सा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गईं। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अनावश्यक रूप से हिलाने डुलाने से बचाना, अत्यधिक रक्तस्राव को नियंत्रित करना, गर्दन और रीढ़ की सुरक्षा करना और समय रहते एंबुलेंस या चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना जीवन रक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक बताया गया।

इस अवसर पर पुलिस आयुक्त वाराणसी श्री मोहित अग्रवाल, अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था श्री शिवहरी मीणा, डीसीपी यातायात श्री अनिल कुमार यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस बल को अधिक संवेदनशील और सक्षम बनाते हैं तथा सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यातायात पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करें तथा सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं, ताकि सभी मिलकर शून्य मृत्यु वाले वाराणसी के लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।

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