वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने और पुलिस व्यवस्था को मानवीय दृष्टिकोण से समझाने के उद्देश्य से Student Police Experiential Learning Programme 3.0 का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत कमिश्नरेट वाराणसी के कुल 18 थानों पर 30 दिवसीय अनुभवात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस कार्यक्रम का संचालन पुलिस आयुक्त वाराणसी के निर्देशन तथा नमिता श्रीवास्तव अपर पुलिस उपायुक्त महिला अपराध के कुशल पर्यवेक्षण में किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र छात्राओं के संज्ञानात्मक कौशल और लोक कौशल को विकसित करना है, जिससे वे कानून व्यवस्था को केवल पुस्तकीय ज्ञान के माध्यम से नहीं बल्कि व्यवहारिक अनुभव के जरिए समझ सकें।
SPEL Programme 3.0 के अंतर्गत छात्र छात्राओं को कानून और आपराधिक प्रक्रिया, आपराधिक अनुसंधान, यातायात नियंत्रण, साइबर क्राइम, मानव तस्करी और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण इंटर्न के रूप में प्रदान किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत कुल 120 घंटे की सिखलाई निर्धारित की गई है, जो प्रतिदिन चार घंटे के आधार पर 30 दिनों में पूरी कराई जाएगी। सभी प्रतिभागी छात्र छात्राओं का पंजीकरण mybharat.gov.in पोर्टल पर कराया गया है तथा प्रत्येक चयनित थाने पर एक उप निरीक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
थाना स्तर पर 20 दिनों तक दो से दस छात्र छात्राओं को अनुभवात्मक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं की प्रतिभा को निखारने का कार्य कर रहा है बल्कि उन्हें पुलिस की वास्तविक परिस्थितियों और कार्यप्रणाली से भी परिचित करा रहा है।
इसी क्रम में दिनांक 03 फरवरी 2026 को SPEL Programme 3.0 के अंतर्गत छात्र छात्राओं को कमिश्नरेट वाराणसी के विभिन्न महिला आश्रमों का भ्रमण कराया गया। यह भ्रमण थानों पर नामित उप निरीक्षक और नोडल अधिकारियों के नेतृत्व में कराया गया। छात्र छात्राओं ने महिला आश्रमों में रह रही निराश्रित महिलाओं से संवाद कर उनके दैनिक जीवन, संघर्ष और जीवनशैली को नजदीक से समझा।
इस भ्रमण का उद्देश्य केवल औपचारिक भेट तक सीमित नहीं था बल्कि छात्र छात्राओं के भीतर संवेदनशीलता, सहानुभूति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना था। आश्रमों में रहने वाली विधवा, वृद्ध, बेसहारा और तलाकशुदा महिलाओं से संवाद के माध्यम से छात्रों ने जीवन की उन वास्तविकताओं को जाना, जिन्हें पाठ्यपुस्तकों में पढ़कर समझ पाना संभव नहीं है।
कार्यक्रम ने छात्रों के मन में करुणा और सम्मान के बीज बोए। उन्होंने महिलाओं की देखभाल और सम्मान के महत्व को महसूस किया और मानवीय मूल्यों की गहरी समझ के साथ लौटे। यह पहल भविष्य में संवेदनशील, जिम्मेदार और समाज के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करने की दिशा में एक सार्थक कदम मानी जा रही है।
