Wed, 14 Jan 2026 12:34:30 - By : Palak Yadav
वर्ष 2026 में खगोलीय घटनाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे, जब कुल चार ग्रहण घटित होंगे। इन चार ग्रहणों में दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्रग्रहण शामिल होंगे। हालांकि इन सभी ग्रहणों में से भारत में केवल एक ही ग्रहण दिखाई देगा और उसी का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव मान्य होगा। शेष तीन ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होंगे, इसलिए उन्हें लेकर सूतक या अन्य परंपरागत मान्यताएं लागू नहीं होंगी। इस जानकारी के सामने आने के बाद खगोल विज्ञान और ज्योतिष दोनों क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भारत में इस वर्ष केवल तीन मार्च को लगने वाला खग्रास उदित चंद्रग्रहण ही दिखाई देगा। यही एकमात्र ग्रहण होगा जिसका प्रभाव देश में मान्य रहेगा। इस चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल भी प्रभावी होगा, जो सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर ग्रहण की समाप्ति के साथ शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। चंद्रग्रहण की शुरुआत चंद्रोदय के साथ शाम 6 बजकर 26 मिनट पर होगी और यह लगभग बीस मिनट तक रहेगा। चूंकि यह ग्रहण होली पर्व के दिन घटित होगा, इसलिए इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जा रहा है और काशी सहित कई धार्मिक क्षेत्रों में इस पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
इसके बाद वर्ष का दूसरा चंद्रग्रहण 28 अगस्त को लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। यह ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में नजर आएगा। भारत में इसके अदृश्य रहने के कारण इस पर सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसी तरह वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को अमावस्या तिथि पर पड़ेगा, लेकिन यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा। वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण रहेगा, परंतु यह भी भारत में दृश्य नहीं होगा और इसे स्पेन रूस और पुर्तगाल के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सकेगा।
भारतीय संस्कृति में ग्रहणों को विशेष महत्व दिया जाता है और सूतक काल के दौरान खान पान और पूजा पाठ से जुड़ी अनेक परंपराएं निभाई जाती हैं। मान्यता है कि ग्रहण के समय मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है, विशेषकर चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा की स्थिति को लेकर विशेष ध्यान रखा जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहणों का अध्ययन ब्रह्मांड की संरचना और ग्रहों की गति को समझने में सहायक होता है। काशी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष होली के दिन पड़ने वाला चंद्रग्रहण ही प्रभावकारी होगा, जबकि इसके अतिरिक्त होने वाले तीन अन्य ग्रहणों का भारत में कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं माना जाएगा। इस प्रकार वर्ष 2026 के ग्रहण धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक जिज्ञासा दोनों को एक साथ जोड़ते नजर आएंगे।