Wed, 14 Jan 2026 12:29:05 - By : Palak Yadav
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में आईआईटी की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले की मंगलवार को फास्टट्रैक कोर्ट प्रथम में सुनवाई हुई। यह कार्यवाही अदालत में कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई, जहां पीड़िता से आरोपित आनंद चौहान के अधिवक्ताओं ने जिरह की। जिरह की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के कारण अदालत ने सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए अगली तिथि तीन फरवरी निर्धारित की। अदालत में पूरे मामले को लेकर गंभीरता बनी रही और कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाई गई।
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है और फरवरी माह में उसके मिड सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं, ऐसे में जिरह की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी चाहिए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने जनवरी माह में प्रदेश बार काउंसिल चुनाव में प्रत्याशी होने के कारण व्यस्तता का हवाला देते हुए जिरह के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि तीन फरवरी को जिरह हर हाल में पूरी की जाए और यदि उस तिथि पर जिरह पूरी नहीं होती या स्थगन प्रार्थना पत्र दिया जाता है तो उसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पीड़िता से बचाव पक्ष द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिरह की जा रही है।
इसी मामले में एक अन्य आरोपित कुणाल पांडेय के अधिवक्ता राजीव प्रताप सिंह की अपील पर अदालत ने पेनड्राइव में संकलित साक्ष्यों के अवलोकन के लिए अठारह और उन्नीस जनवरी की तिथि तय की है। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि विवेचना के दौरान लंका पुलिस द्वारा बीएचयू परिसर में लगे कैमरों से वीडियो फुटेज संकलित किया गया है, जिसे साक्ष्य के रूप में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। अदालत ने इन साक्ष्यों की जांच के लिए समय निर्धारित करते हुए आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की है।