सावधान बनारस: बाजार के खाने से हो सकता है गंभीर नुकसान
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : बनारस के नागरिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। चाहे आप साधारण परिवार से हों या विशिष्ट, अपनी और अपने परिवार की सेहत को प्राथमिकता दें। घर का बना भोजन ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। बाहर मिलने वाला खाना आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
समस्या क्या है?
शहर में खाने-पीने की दुकानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इन पर नियंत्रण और निगरानी लगभग न के बराबर है। खाद्य विभाग द्वारा निरीक्षकों की नियुक्ति तो की गई है, परंतु जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता बहुत सीमित दिखाई देती है।
कई दुकानें बिना पंजीकरण के संचालित हो रही हैं। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की नियमित जांच नहीं हो रही है और स्वच्छता के नियमों का पालन भी नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति में आम जनता अनजाने में जोखिम भरा भोजन कर रही है।
जहरीले और हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल
लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने के लिए कई दुकानदार खाने में सस्ते और खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये पदार्थ स्वाद बढ़ाने के लिए मिलाए जाते हैं, लेकिन लंबे समय में शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होते हैं। लोग स्वाद के चक्कर में इन पदार्थों का सेवन कर लेते हैं, जो धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
ऐसे भोजन का लगातार सेवन करने से पाचन तंत्र प्रभावित होता है। लीवर और किडनी पर नकारात्मक असर पड़ता है और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई मामलों में यह स्थिति गंभीर बीमारियों का रूप भी ले सकती है। सस्ते और अस्वास्थ्यकर भोजन के कारण लोगों का स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा है।
निरीक्षण और सैंपलिंग की कमी
खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है कि वह नियमित रूप से दुकानों की जांच करे और सैंपलिंग के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित करे। लेकिन वास्तविकता यह है कि नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा है और सैंपलिंग की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी है। इससे बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है।
अधिकांश दुकानें अपंजीकृत
शहर की बड़ी संख्या में दुकानें बिना लाइसेंस के चल रही हैं। लाइसेंस प्रक्रिया जटिल होने, अधिक औपचारिकताओं और भ्रष्टाचार के कारण छोटे विक्रेता इससे बचते हैं और बिना अनुमति के ही कारोबार करते हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग की भूमिका पर सवाल
जब खाद्य विभाग अपनी मूल जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पा रहा है, तो इस पर खर्च होने वाले सरकारी संसाधनों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता के टैक्स का सही उपयोग तभी संभव है जब विभाग अपनी जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से निभाए।
जिलाधिकारी से अपील
जिलाधिकारी महोदय से निवेदन है कि जनहित में तत्काल प्रभाव से सभी खाद्य दुकानों की व्यापक जांच कराई जाए। नियमित सैंपलिंग सुनिश्चित की जाए और अपंजीकृत दुकानों पर सख्त कार्रवाई की जाए। जनता आपके प्रशासन पर भरोसा करती है, इसलिए उनके स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
जनता से अपील
आपका स्वास्थ्य अमूल्य है। इसलिए घर का बना भोजन प्राथमिकता दें, स्ट्रीट फूड और सस्ते बाजारू खाने से बचें और स्वाद के बजाय सेहत को महत्व दें। सतर्क रहें और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
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