- चंदौली में जंगली सुअरों का आतंक, खेत में काम कर रहे दंपती पर हमला, हालत गंभीर
- सुबह खेत में काम के दौरान हुआ हमला
- ग्रामीणों ने बचाया, निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया
- ट्रामा सेंटर वाराणसी किया गया रेफर
- गांव में दहशत, खेतों में जाने से डर रहे किसान
- वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
- तहसीलदार पहुंचे मौके पर
- विशेष अभियान चलाने की मांग
चंदौली में जंगली सुअरों का आतंक, खेत में काम कर रहे दंपती पर हमला, हालत गंभीर
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : चकिया तहसील क्षेत्र के नसरथा गांव में जंगली सुअरों के बढ़ते आतंक ने ग्रामीणों की चिंता और दहशत दोनों बढ़ा दी है। बुधवार सुबह खेत में काम कर रहे धनराज और उनकी पत्नी रामरती पर अचानक जंगली सुअरों के झुंड ने हमला कर दिया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया।
सुबह खेत में काम के दौरान हुआ हमला
जानकारी के अनुसार नसरथा गांव निवासी धनराज और उनकी पत्नी रामरती रोज की तरह सुबह अपने खेत में कृषि कार्य कर रहे थे। इसी दौरान पास की झाड़ियों से अचानक जंगली सुअरों का झुंड निकलकर खेत में घुस आया। ग्रामीणों के मुताबिक सुअरों ने बिना किसी उकसावे के दोनों पर हमला कर दिया। हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोनों जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
ग्रामीणों ने बचाया, निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया
घटना के समय आसपास के खेतों में मौजूद किसानों ने शोर सुनकर मौके की ओर दौड़ लगाई। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों के सहारे किसी तरह जंगली सुअरों को खदेड़ा और घायल दंपती को उनके चंगुल से छुड़ाया। दोनों के शरीर पर गहरे घाव थे और काफी रक्तस्राव हो रहा था। स्थिति गंभीर देख ग्रामीणों ने एंबुलेंस का इंतजार किए बिना निजी वाहन की व्यवस्था की और उन्हें तत्काल जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया पहुंचाया।
ट्रामा सेंटर वाराणसी किया गया रेफर
जिला संयुक्त चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने दोनों की हालत नाजुक बताई। चिकित्सकों के अनुसार जंगली सुअरों के हमले से गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं और संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है। बेहतर इलाज के लिए धनराज और रामरती को वाराणसी स्थित ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया।
गांव में दहशत, खेतों में जाने से डर रहे किसान
घटना के बाद नसरथा गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई महीनों से जंगली सुअरों का झुंड खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। कई बार मवेशियों को भी खदेड़ा गया है। अब इंसानों पर हमले की घटना से लोग सहम गए हैं। किसानों का कहना है कि वे खेतों में काम करने जाने से भी डरने लगे हैं।
वन विभाग पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जंगली सुअरों के बढ़ते आतंक की सूचना पहले भी विभाग को दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते तो यह घटना टाली जा सकती थी।
तहसीलदार पहुंचे मौके पर
घटना की सूचना मिलने के बाद चकिया तहसील प्रशासन हरकत में आया। तहसीलदार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि वन विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घायलों को शासन स्तर से आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
विशेष अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगली सुअरों को पकड़ने या आबादी से दूर सुरक्षित क्षेत्र में छोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उनका कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक ग्रामीणों की जान और फसल दोनों खतरे में रहेंगे।
नसरथा गांव की यह घटना प्रशासन और वन विभाग के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
