दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए दंतेवाड़ा जिले में तैनात पुलिस उपाधीक्षक कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। गृह पुलिस विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार शुरुआती जांच में उनके खिलाफ बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। मामला एक व्यवसायी को कथित रूप से लव ट्रैप में फंसाकर लगभग ढाई करोड़ रुपये की अवैध वसूली से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसने पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, जांच में दर्ज कराए गए बयान और मामले से संबंधित चैट की गहन समीक्षा की गई। इस प्रक्रिया में कई स्तरों पर विरोधाभास पाए गए, जिससे संदेह और गहराता गया। जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित अधिकारी ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त किए। साथ ही अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के भी संकेत मिले हैं, जो नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं।
सरकारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि DSP कल्पना वर्मा के कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रत्यक्ष उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं। नियमों के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी को पद की गरिमा और दायित्वों के अनुरूप आचरण करना अनिवार्य होता है, लेकिन प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को गंभीर बना दिया है। इसी आधार पर सरकार ने निलंबन का निर्णय लिया, ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच में कोई बाधा न आए।
निलंबन अवधि के दौरान DSP कल्पना वर्मा का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह के लिए गुजारा भत्ता प्रदान किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार आगे की जांच जारी है और यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
यह मामला न केवल पुलिस विभाग की साख से जुड़ा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर सख्ती बरतने से पीछे नहीं हटेगी। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
