बिजली बिल 2025 के खिलाफ उबाल: 25 करोड़ किसान-मजदूर सड़कों पर उतरने को तैयार

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बजट सत्र में विधेयक आगे बढ़ने पर देशभर में आंदोलन की चेतावनी।

नई दिल्ली/लखनऊ: केंद्र सरकार द्वारा संसद के आगामी बजट सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पेश करने या पारित कराने की किसी भी पहल के खिलाफ देशभर में व्यापक जन आंदोलन की चेतावनी दी गई है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों के अनुसार, दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि यदि सरकार बिल को आगे बढ़ाती है तो 25 करोड़ से अधिक किसान, मजदूर, बिजली कर्मचारी और अभियंता सड़कों पर उतरेंगे। आंदोलन का स्वरूप राष्ट्रव्यापी होगा और इसमें संगठित व त्वरित प्रतिरोध शामिल रहेगा।

संघर्ष समिति ने बताया कि मंगलवार देर रात आयोजित एक अहम ऑनलाइन बैठक में निजीकरण और प्रस्तावित संशोधन विधेयक को लेकर रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि संसद के माध्यम से किसी भी एकतरफा कदम के खिलाफ किसान और मजदूर संगठन ‘लाइटनिंग एक्शन’ के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे। इस बैठक में एटक की जनरल सेक्रेटरी अमरजीत कौर, इंटक के अशोक सिंह, सीटू के तपन सेन, संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शन पाल सहित हिंद मजदूर सभा, एआईयूटीयूसी और यूटीयूसी के प्रमुख पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिससे आंदोलन की व्यापकता और समन्वय का संकेत मिलता है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बैठक के बाद कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी पिछले 427 दिनों से लगातार निजीकरण के खिलाफ संघर्षरत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघर्ष समिति का रुख अडिग है और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से जुड़े टेंडर जारी होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनके अनुसार, यह कदम कर्मचारियों के अधिकारों, उपभोक्ताओं के हितों और सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा व्यवस्था की रक्षा के लिए आवश्यक है।

नेतृत्व ने यह भी दोहराया कि प्रस्तावित विधेयक और निजीकरण की प्रक्रिया से बिजली आपूर्ति की सुलभता, दरों की स्थिरता और सेवा की जवाबदेही पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी आशंका के चलते विभिन्न श्रमिक संगठनों और किसान मोर्चा ने साझा मंच से संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया है। आने वाले दिनों में आंदोलन की रूपरेखा और कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा की जाएगी, जबकि केंद्र सरकार की बजट सत्र की कार्यसूची पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।