वाराणसी: रामनगर/प्रशासनिक लापरवाही की हदें पार, हाइट गेज में फंसा नगर निगम का पशु बंदी वाहन

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सामने घाट पुल के पास हाइट गेज में फंसने से रामनगर में लंबा जाम; एंबुलेंस भी फंसी।

वाराणसी: रामनगर थाना क्षेत्र में आज बृहस्पतिवार को जो दृश्य सामने आया, उसने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि नियम-कानून केवल कागज़ों तक सीमित होकर रह गए हैं। सामने घाट पुल के पास लगे हाइट गेज में नगर निगम वाराणसी का सचल पशु बंदी वाहन फंस गया, जिसके बाद कुछ ही पलों में पूरा इलाका भीषण जाम की चपेट में आ गया। यह जाम सामान्य नहीं था, बल्कि ऐसा जाम था जिसने इंसानियत, संवेदनशीलता और प्रशासनिक जिम्मेदारी—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

सुबह के व्यस्त समय में हुई इस घटना के कारण पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल वाहन, दोपहिया और पैदल राहगीर सभी जहां-तहां फंस गए। सबसे चिंताजनक स्थिति तब देखने को मिली, जब जाम में एंबुलेंस भी फंसी रह गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि यही मार्ग रामनगर, सामने घाट और आसपास के इलाकों को शहर से जोड़ने का प्रमुख रास्ता है, जिससे प्रतिदिन हजारों मरीजों और एंबुलेंसों का आना-जाना होता है। ऐसे में इस मार्ग पर जाम लगना सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ के समान है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नगर निगम का सचल पशु बंदी वाहन हाइट गेज में इतनी बुरी तरह फंसा कि उसे निकालने के लिए चालक को ट्रक के पहियों की हवा निकालनी पड़ी। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग गया और जाम लगातार बढ़ता चला गया। इस दौरान वाहन के अंदर बंद दो पशु भी बुरी तरह परेशान नजर आए। लोग बताते हैं कि पशु काफी देर तक उसी वाहन में भूखे-प्यासे पड़े रहे। तेज धूप, गर्मी और जाम के बीच उनकी हालत देखकर राहगीरों में गहरी नाराजगी और पीड़ा देखी गई। बाद में पहियों की हवा निकालकर वाहन को किसी तरह बाहर निकाला गया और फिर दोबारा हवा भरकर उसे आगे ले जाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सामने घाट पुल पर भारी वाहनों को रोकने के लिए हाइट गेज लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद सामने घाट की ओर से आने वाले भारी वाहनों पर कोई प्रभावी रोक नहीं है। आए दिन कोई न कोई बड़ा वाहन इसी हाइट गेज में फंस जाता है और रामनगर की जनता को जाम की सजा भुगतनी पड़ती है। इस बार विडंबना यह रही कि नियमों की निगरानी करने वाला विभाग खुद नियमों का उल्लंघन करता नजर आया।

राहगीरों और स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला कि यदि यही गलती किसी आम नागरिक या निजी वाहन चालक से होती, तो तत्काल चालान काट दिया जाता। लेकिन जब नगर निगम का वाहन नियम तोड़ता है, तो कार्रवाई की बात तक नहीं होती। लोगों ने तीखा सवाल उठाया कि क्या नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए बने हैं और सरकारी विभाग इनसे ऊपर हैं?

सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि यह मिनी पुल केवल हल्के वाहनों के लिए बनाया गया था। इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही के चलते दिन-रात भारी वाहनों का आवागमन इसी पुल से कराया जा रहा है। लगातार भारी वाहनों के दबाव से पुल की हालत दिन-ब-दिन जर्जर होती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल से गुजरते समय कंपन महसूस होता है और हर पल किसी बड़ी अनहोनी का डर बना रहता है। यदि समय रहते इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होना तय माना जा रहा है।

रामनगर और आसपास के इलाकों के लोगों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से सख्त मांग की है कि हाइट गेज के नियमों को कागज़ों से निकालकर जमीन पर लागू किया जाए, भारी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और नियम तोड़ने वालों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई हो—चाहे वह किसी भी विभाग का वाहन क्यों न हो। साथ ही पुल की तकनीकी जांच कर उसकी वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले हालात को संभाला जा सके।

लोगों का साफ कहना है कि यह केवल जाम की समस्या नहीं, बल्कि आम जनता, मरीजों और बेजुबान पशुओं की जान से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि अब भी प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब किसी बड़ी त्रासदी के बाद जवाबदेही तय करने की जगह सिर्फ बयानबाजी ही रह जाएगी। रामनगर की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल और ठोस कार्रवाई चाहती है।