लखनऊ में जनसुनवाई: उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सत्येंद्र कुमार बारी ने भूमि विवादों पर संज्ञान लिया
लखनऊ: प्रदेश की राजधानी स्थित अपने शासकीय आवास पर पिछड़ा आयोग के सदस्य सत्येंद्र बारी उर्फ बीनू ने एक बार फिर जनसमस्याओं के प्रति अपनी सक्रियता और संवेदनशीलता का परिचय दिया। बुधवार को बलिया निवासी गौतम बारी, गाजीपुर निवासी नूर मोहम्मद, श्री आनंद बारी तथा आकाश राजभर अपनी भूमि संबंधी मामलों को लेकर उनसे मिलने पहुंचे। सभी फरियादियों ने अपनी-अपनी समस्याओं का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया, जिस पर सत्येंद्र बारी ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
लंबित भूमि विवादों पर जताई चिंता
जनसुनवाई के दौरान उपस्थित लोगों ने बताया कि भूमि से जुड़े विवाद लंबे समय से लंबित हैं और स्थानीय स्तर पर समाधान न निकल पाने के कारण उन्हें राजधानी का रुख करना पड़ा। सत्येंद्र बारी ने गंभीरता से प्रत्येक पक्ष की बात सुनी और स्पष्ट कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी न केवल नागरिकों को परेशान करती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की छवि को भी प्रभावित करती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रकरणों की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
न्याय की उम्मीद लेकर आने वाला निराश न लौटे
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान ही जनप्रतिनिधियों और आयोग के सदस्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति न्याय की उम्मीद लेकर आता है तो उसे निराश नहीं लौटना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी प्रकरणों की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर भी बात की जाएगी। यह संवाद जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है।
दूरदराज जिलों से आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत
शासकीय आवास पर आयोजित इस मुलाकात का वातावरण औपचारिक होते हुए भी आत्मीयता से भरा रहा। सत्येंद्र बारी ने बलिया और गाजीपुर से आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि प्रदेश के दूरदराज जिलों से लोग यदि अपनी बात लेकर राजधानी आते हैं तो यह प्रशासन के लिए संकेत है कि जमीनी स्तर पर संवाद और प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सामाजिक सरोकारों और क्षेत्रीय विकास पर भी चर्चा
इसी क्रम में उनके हृदय प्रिय भाई गुड्डू बारी का भी स्वागत किया गया। मुलाकात के दौरान सामाजिक सरोकारों, क्षेत्रीय विकास और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उपस्थित लोगों ने सत्येंद्र बारी की सक्रियता और तत्परता की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि उनके हस्तक्षेप से जमीन संबंधी विवादों का न्यायपूर्ण समाधान निकलेगा।
राजधानी में हुई यह जनसुनवाई एक संदेश भी देती है कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पहल करें तो कई जटिल प्रतीत होने वाले मामले भी समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी कर नागरिकों को राहत पहुंचाते हैं या नहीं।
