महराजगंज में पोस्टमार्टम से ठीक पहले युवक की हुई पहचान, स्वजन में मचा कोहराम
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक युवक की पहचान पोस्टमार्टम से ठीक पहले होने का मामला सामने आया है। चौक थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव के पास चार दिन पूर्व अचेत अवस्था में मिले युवक की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। पहचान न होने के कारण शव को मोर्चरी में रखवाया गया था और लावारिश मानते हुए पोस्टमार्टम की तैयारी की जा रही थी। इसी बीच युवक के स्वजन गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे और फोटो मिलान के बाद उसकी पहचान हो सकी।
ईंट भट्ठे के पास अचेत मिला था युवक
जानकारी के अनुसार, 6 अप्रैल की शाम चैनपुर गांव के दक्षिण स्थित एक ईंट भट्ठे के मुंशी ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक युवक साइकिल सहित सड़क किनारे अचेत अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलने पर चौक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौक में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान हुई मौत, पहचान नहीं हो सकी
चिकित्सकों द्वारा रातभर उपचार किए जाने के बावजूद 7 अप्रैल की सुबह युवक की मृत्यु हो गई। उसके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज न मिलने के कारण पुलिस उसकी शिनाख्त नहीं कर सकी और शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया। पुलिस लगातार पहचान के प्रयास में जुटी रही।
72 घंटे बाद पोस्टमार्टम की तैयारी
चौक थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता के अनुसार, 72 घंटे तक पहचान न होने पर शव को लावारिश मानते हुए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। शुक्रवार को पोस्टमार्टम की तैयारी चल रही थी, तभी मामले में अहम मोड़ आया।
गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे स्वजन, फोटो से हुई पहचान
इसी दौरान ठूठीबारी कोतवाली क्षेत्र के बोदना गांव निवासी युवक रामानंद के पिता चंद्रिका, भाई रमाकांत, पत्नी इसरावती और पुत्र सुनील व संजय गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे। संयोगवश ठूठीबारी कोतवाल अमित सिंह, जो पूर्व में चौक थाने में तैनात रह चुके थे, ने गुमशुदा की फोटो देखकर शक जताया और चौक में मिले अज्ञात शव की तस्वीर से मिलान कराया। मिलान के बाद युवक की पहचान रामानंद के रूप में हो गई।
सूचना मिलते ही स्वजन बदहवास
पहचान की पुष्टि होते ही पुलिस ने तुरंत स्वजन को सूचना दी। यह खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। स्वजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव की शिनाख्त की। इसके बाद पुलिस ने विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम कराया।
मानसिक रूप से परेशान था युवक
परिजनों के अनुसार, रामानंद पिछले छह वर्षों से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। 6 अप्रैल को सुबह करीब 11 बजे वह साइकिल से घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन के बाद स्वजन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने पहुंचे थे।
पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपा गया
चौक थानाध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद वे अंतिम संस्कार के लिए रवाना हो गए। पुलिस मामले में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर चुकी है।
संवेदनशीलता और सतर्कता का उदाहरण
यह घटना पुलिस की सतर्कता और समन्वय का भी उदाहरण है, जहां समय रहते फोटो मिलान के जरिए एक अज्ञात शव की पहचान संभव हो सकी। हालांकि, इस घटना ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।
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