बोधगया बैठक के बाद जीतनराम मांझी के प्रतिनिधि मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी का निधन, राजनीतिक जगत में शोक

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Dilip Kumar
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बोधगया बैठक के बाद निधन हुए मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी की एक पुरानी तस्वीर।

बोधगया मंदिर सलाहकार बोर्ड बैठक के बाद मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी का निधन, राजनीतिक जगत में शोक

बोधगया मंदिर सलाहकार बोर्ड की बैठक के बाद गया से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के प्रतिनिधि तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी का हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। यह घटना बैठक स्थल से बाहर निकलने के तुरंत बाद हुई, जिससे वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बैठक समाप्त होने के बाद जैसे ही वे बाहर निकले, अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उपस्थित लोगों ने तत्काल उन्हें उपचार के लिए मगध मेडिकल कॉलेज, गया पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका

मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी पिछले लगभग 25 वर्षों से सक्रिय राजनीति में थे। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) में उनकी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और जमीनी कार्यशैली के कारण उन्हें विशेष पहचान मिली थी। वे पार्टी के कई महत्वपूर्ण आंदोलनों और कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाते रहे।

उनके आकस्मिक निधन की खबर मिलते ही गया और बोधगया क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इसे संगठन के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

निरंजना नदी घाट पर अंतिम संस्कार

स्वर्गीय चंद्रवंशी का अंतिम संस्कार निरंजना नदी घाट पर पूरे विधि विधान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में राजनीतिक सहयोगी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। शोक संतप्त वातावरण में सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

शोकाकुल राजनीतिक परिवार में नीरज निश्चल उर्फ मुनिलाल, कृष्ण साहू, वाहिद अली, बैजू यादव और सतेंद्र सिंह सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री ने जताई संवेदना

केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी स्वयं उनके आवास पहुंचे और परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी शोक प्रकट करते हुए लिखा कि मार्कण्डेय प्रसाद उनके दुख सुख के साथी थे और हर अच्छे बुरे समय में साथ खड़े रहे।

उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

मार्कण्डेय प्रसाद चंद्रवंशी के निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक शून्य पैदा हो गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।