यूजीसी की समता समिति पर मायावती का समर्थन, विरोध को बताया जातिवादी सोच का नतीजा

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Savan Nayak
मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और...
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यूजीसी की समता समिति पर मायावती का समर्थन, विरोध को बताया जातिवादी सोच का परिणाम

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में समता समिति के गठन के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने इसे उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में सही कदम बताया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण नियम को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा और सभी पक्षों को विश्वास में लेना आवश्यक था ताकि समाज में अनावश्यक तनाव की स्थिति न बने।

मायावती ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के इस फैसले का जो विरोध हो रहा है वह केवल जातिवादी मानसिकता का परिचायक है। उनके अनुसार कुछ लोग इस व्यवस्था को अपने खिलाफ षड्यंत्र बताकर भ्रम फैला रहे हैं जबकि इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समता समिति का गठन किसी वर्ग के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था को न्यायपूर्ण बनाने के लिए किया गया है।

बसपा सुप्रीमो ने यह भी कहा कि पार्टी का मानना है कि यदि इस नियम को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से संवाद किया गया होता तो बेहतर होता। ऐसा करने से गलतफहमियां कम होतीं और देश में सामाजिक तनाव की आशंका भी नहीं बनती। उन्होंने सरकार और संस्थानों से अपील की कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लेते समय सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई जाए।

मायावती ने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता के भड़काऊ बयानों के बहकावे में आकर प्रतिक्रिया न दें और संयम बनाए रखें। उनके अनुसार कुछ स्वार्थी तत्व ऐसे मुद्दों की आड़ में घिनौनी राजनीति करते हैं और समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए और अपने अधिकारों की लड़ाई शांति और समझदारी से लड़नी चाहिए।

गौरतलब है कि यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिल रही है। केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं और कुछ सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने भी इस फैसले पर असहमति जताई है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं जिससे आने वाले दिनों में इस पर और बहस होने की संभावना है।

मेरा नाम सावन कुमार है, और मैं न्यूज रिपोर्ट में वरिष्ठ क्राइम संवाददाता के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता के प्रति मेरी गहरी रुचि है, और मैं हमेशा निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का प्रयास करता हूँ। समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करना और जनता की आवाज़ को सही मंच तक पहुँचाना मेरा उद्देश्य है।