मिर्जापुर: यूपी पुलिस का सिपाही गिरफ्तार, ‘आयरन फायर जिम’ की आड़ में चल रहा था सुनियोजित षड्यंत्र

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मिर्जापुर के ‘आयरन फायर जिम’ से जुड़े कथित धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग मामले में पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी।

मिर्जापुर: शहर में सामने आए जिम के जरिए कथित धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर मामले ने पुलिस महकमे को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। जांच के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही की संलिप्तता उजागर होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला मिर्जापुर के आयरन फायर जिम से जुड़ा है, जिसकी गतिविधियों पर लंबे समय से संदेह था। जांच में सामने आया कि जिम का वास्तविक संचालन पुलिस सिपाही इरशाद खां की निगरानी में हो रहा था, जबकि कागजों में उसका संचालन फरीद अहमद के नाम पर दर्ज था।

डीआईजी विंध्याचल रेंज सोमेन बर्मा ने बताया कि गिरफ्तार सिपाही इरशाद खां वर्तमान में माधोसिंह रेलवे स्टेशन पर जीआरपी में तैनात है। मूल रूप से गाजीपुर के गहमर का रहने वाला इरशाद खां बीते कई वर्षों से मिर्जापुर में रह रहा था। इस दौरान उसने आयरन फायर जिम को सक्रिय रूप से संचालित किया, हालांकि आधिकारिक दस्तावेजों में जिम का मालिक और संचालक फरीद अहमद को दर्शाया गया था। फरीद न केवल कागजों में जिम का मालिक था, बल्कि वहां ट्रेनर के रूप में भी कार्य करता था। पुलिस का कहना है कि इरशाद खां ड्यूटी समाप्त करने के बाद नियमित रूप से जिम पहुंचता था और पूरे संचालन पर उसकी पैनी नजर रहती थी।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इरशाद का परिवार मिर्जापुर में ही रहता है और एक वर्ष पहले उसका तबादला माधोसिंह स्टेशन स्थित जीआरपी में हुआ था। इससे पहले वह मिर्जापुर के विभिन्न थानों में न्यायालय ड्यूटी में तैनात रह चुका है। इसी दौरान जिम के जरिए कथित रूप से युवतियों को निशाना बनाने का सिलसिला चलता रहा। पुलिस के अनुसार, जिम की आड़ में चल रहा यह नेटवर्क बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था।

वहीं इस मामले का मुख्य आरोपी फरीद अहमद पहले ही पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने उसे खड़ंजा फाल के पास से दबोचा, जहां मुठभेड़ के दौरान उसके बाएं पैर में गोली लगी। फरीद को इलाज के बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, फरीद जिम में आने वाली युवतियों से पहले दोस्ती करता, फिर उन्हें प्रेम जाल में फंसाता था। इसके बाद निजी वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक जिम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार संगठित तरीके से फैलाए गए एक नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। जांच में ‘लव जिहाद’ के एंगल से भी पड़ताल की जा रही है, जिसमें प्रेम और भरोसे का इस्तेमाल कर युवतियों को मानसिक दबाव में लाकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि साक्ष्यों और पीड़िताओं के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश भर में चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर एक पुलिसकर्मी की कथित भूमिका सामने आने से विभागीय छवि पर भी सवाल उठे हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। मिर्जापुर जिम प्रकरण अब कानून-व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा और युवाओं के बीच बढ़ते ऐसे जालों को लेकर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।