भाजपा को नया सेनापति, 2026 की चुनावी जंग का ब्लूप्रिंट तैयार नितिन नबीन के हाथ कमान, पीएम मोदी ने सौंपा मिशन बंगाल–केरल

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दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में कार्यक्रम के दौरान नितिन नबीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी को नितिन नबीन के रूप में ऐसे समय नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है, जब देश की सियासत एक बार फिर बड़े चुनावी दौर में प्रवेश करने जा रही है। आने वाले महीनों और वर्षों में कई अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और इसी बीच नितिन नबीन की ताजपोशी ने पार्टी के संगठनात्मक और राजनीतिक एजेंडे को नई दिशा दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल नए अध्यक्ष को खुले मंच से शुभकामनाएं दीं, बल्कि भविष्य की चुनावी रणनीति को लेकर स्पष्ट संदेश और जिम्मेदारियां भी सौंप दीं।

14 दिसंबर को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन के लिए बीते एक महीने का समय पार्टी के भीतर एक तरह का प्रोबेशन पीरियड माना गया। खरमास के दौरान संगठनात्मक समीकरणों को समझने और जिम्मेदारियों को आत्मसात करने के बाद अब 20 जनवरी से उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में हुए कार्यक्रम में उनका स्वागत न केवल औपचारिक था, बल्कि यह संदेश भी साफ था कि पार्टी नेतृत्व उनसे बड़े और निर्णायक रोल की अपेक्षा कर रहा है।

नए अध्यक्ष के कार्यभार संभालते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन को आगामी विधानसभा चुनावों का स्पष्ट टास्क सौंप दिया। वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को भाजपा के लिए निर्णायक बताते हुए मोदी ने खास तौर पर पश्चिम बंगाल और केरल पर ज्यादा फोकस करने की बात कही। अपने संबोधन में मोदी ने भाजपा को ‘चुनावी मशीन’ कहे जाने के पीछे की सोच और कार्यशैली को भी नए अध्यक्ष के सामने विस्तार से रखा।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठकों का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा की ताकत सिर्फ जीत में नहीं, बल्कि जीत के बाद भी आत्ममंथन करने की संस्कृति में है। उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है जो जश्न के बीच भी अपनी कमियों की समीक्षा करती है और समय का उपयोग आगे की तैयारी में लगाती है। महाराष्ट्र के हालिया निकाय चुनावों का हवाला देते हुए मोदी ने बताया कि वहां जीत के दिन ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति पर काम शुरू कर दिया था।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने नितिन नबीन की जमकर सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भाजपा परिवार को आज एक ऊर्जावान और अनुभवी मुखिया मिला है। मंच से मोदी ने कहा, “नितिन नबीन जी मेरे बॉस हैं और मैं एक कार्यकर्ता हूं।” इस बयान को पार्टी के भीतर नेतृत्व की सामूहिक भावना और संगठनात्मक अनुशासन के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

पीढ़ियों के बदलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नितिन नबीन उस पीढ़ी से आते हैं जिसने बचपन में रेडियो पर खबरें सुनीं और आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। उनके पास युवा ऊर्जा और लंबे संगठनात्मक अनुभव का संतुलन है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि नितिन नबीन की जिम्मेदारी केवल भाजपा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें एनडीए के सभी सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि अब नितिन नबीन हम सभी के अध्यक्ष हैं और उनका दायित्व राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन को मजबूत रखने का भी है।

आने वाले चुनावों की चर्चा से पहले प्रधानमंत्री ने हालिया चुनावी आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्वीकार किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘अबकी बार 400 पार’ का लक्ष्य हासिल नहीं हो सका, लेकिन इसके बावजूद बीते डेढ़-दो वर्षों में भाजपा पर जनता का भरोसा और मजबूत हुआ है। विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की स्ट्राइक रेट अभूतपूर्व रही है। छह राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में से चार में भाजपा या एनडीए को जीत मिली है, वहीं नगर पालिकाओं और नगर निगमों में भी भाजपा पहली पसंद बनकर उभरी है।

केरल का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां भाजपा के करीब 100 पार्षद हैं और तिरुवनंतपुरम में 45 साल बाद लेफ्ट से मेयर पद छीनकर भाजपा ने नया इतिहास रचा है। मोदी ने भरोसा जताया कि आने वाले विधानसभा चुनावों में केरल की जनता भाजपा को अवसर जरूर देगी। पंचायत और निकाय चुनावों के नतीजों को विधानसभा चुनावों की झलक बताते हुए उन्होंने नितिन नबीन को केरल मिशन पर विशेष ध्यान देने का संकेत दिया।

पश्चिम बंगाल और असम के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने घुसपैठ के मुद्दे को सबसे बड़ा चुनावी चैलेंज बताया। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के तहत जो दल घुसपैठियों को संरक्षण दे रहे हैं, उन्हें पूरी ताकत से जनता के सामने बेनकाब करना होगा। हालिया असम दौरे और पश्चिम बंगाल में दिए गए भाषणों का हवाला देते हुए मोदी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में केंद्र में रहेगा।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं नितिन नबीन को कुर्सी पर बैठाकर उन्हें सम्मान दिया। यह दृश्य सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि यह संकेत भी था कि पार्टी नेतृत्व नए अध्यक्ष के कंधों पर बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी सौंप चुका है। आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की रणनीति और प्रदर्शन काफी हद तक नितिन नबीन की संगठनात्मक क्षमता और नेतृत्व कौशल पर निर्भर करेगा।