वाराणसी: धर्म और संस्कृति की राजधानी काशी में आज लोकतंत्र की एक अनुपम तस्वीर देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय जनसंपर्क कार्यालय, गुरुधाम में कैन्ट विधानसभा के लोकप्रिय विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने अपनी साप्ताहिक जनसुनवाई के जरिए सुशासन की एक नई इबारत लिख दी। यह केवल शिकायतों का पुलिंदा लेने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसी चौपाल थी जहाँ सत्ता का अहंकार शून्य और जनसेवा का संकल्प सर्वोच्च नजर आया। सुबह 11 बजे से ही कार्यालय में फरियादियों का तांता इस विश्वास के साथ लगा था कि “विधायक जी के पास आए हैं, तो खाली हाथ नहीं जाएंगे।”
विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने घंटों तक बिना थके एक-एक फरियादी की बात को किसी परिवार के मुखिया की तरह सुना। नदेसर की बुजुर्ग मुन्नी देवी जब अपनी रुकी हुई विधवा पेंशन का दुखड़ा लेकर पहुंचीं, तो विधायक ने तत्काल संवेदना दिखाते हुए जिला प्रोबेशन अधिकारी को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि एक असहाय महिला को सरकारी दफ्तरों के चक्कर क्यों काटने पड़ रहे हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के कार्यों में शिथिलता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खोजवाँ से आई अनीता देवी बिंद की शिकायत पर, जिसमें देर रात तक पिज्जा आउटलेट के शोर से मोहल्ले का चैन छिन गया था, विधायक ने भेलूपुर पुलिस को तत्काल ‘एक्शन मोड’ में आने का आदेश दिया। उन्होंने साफ संदेश दिया कि विकास की आड़ में नागरिकों की शांति से समझौता नहीं होगा।
बैंक की पेचीदगियों और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी विधायक का कड़ा चाबुक चला। लहरतारा के कृष्णमोहन सिंह के बैंक खाते से जुड़े प्रकरण में उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि नियमों का हवाला देकर जनता को प्रताड़ित न किया जाए। वहीं, शिवपुर में निजी जमीन पर अवैध सड़क निर्माण और निराला नगर में खुले नालों की समस्या पर उन्होंने नगर निगम के मुख्य अभियंता और नगर आयुक्त को सीधी चेतावनी दी कि धरातल पर बदलाव दिखना चाहिए। शिवकुमार मौर्य की जमीन की नापजोख कराकर उन्हें न्याय दिलाने का विधायक का त्वरित निर्णय चर्चा का विषय बना रहा।
इस मैराथन जनसुनवाई में कुशाग्र श्रीवास्तव, अभिषेक और रजनीश पाठक की टीम ने व्यवस्था संभाली, लेकिन केंद्र में केवल विधायक सौरभ श्रीवास्तव का वह सेवा भाव था, जिसने आज कई चेहरों पर मुस्कान लौटा दी। यह जनसुनवाई न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी, बल्कि जनता के भरोसे की एक ऐसी जीत थी जिसे काशीवासी लंबे समय तक याद रखेंगे। विधायक ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि वे राजनीति में केवल पद के लिए नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा हरने के लिए समर्पित हैं।
