प्राणमिता चंद्रा ने अखिल भारतीय एथलेटिक्स में जीते दो स्वर्ण, एक कांस्य पदक

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Mridul Kr Tiwari
Mridul Kr Tiwari is the Editor-in-Chief of News Report, a registered Hindi newspaper dedicated to credible, independent, and public-interest journalism. He oversees editorial operations, newsroom standards,...
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शिलांग में आयोजित प्रतियोगिता में पदक के साथ प्राणमिता चंद्रा

पिता मृत्युशैया पर थे और बेटी ट्रैक पर स्वर्ण पदक के लिए दौड़ लगा रही थी। यह दृश्य केवल एक खेल प्रतियोगिता की कहानी नहीं, बल्कि अदम्य साहस और संकल्प का उदाहरण बन गया। दामोदर घाटी निगम से जुड़ी एथलीट प्राणमिता चंद्रा ने शिलांग में आयोजित अखिल भारतीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में असाधारण प्रदर्शन करते हुए देश भर में सराहना बटोरी।

यह प्रतियोगिता पावर स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के तत्वावधान में और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के सहयोग से आयोजित की गई थी। इसमें ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संस्थानों की टीमों ने भाग लिया। महिला वर्ग में दामोदर घाटी निगम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्राणमिता चंद्रा ने 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक और 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक अपने नाम किया। उनके इस प्रदर्शन के चलते डीवीसी को महिला वर्ग में फर्स्ट रनर अप का खिताब भी मिला।

प्राणमिता चंद्रा वर्तमान में बीपी नियोगी अस्पताल डीवीसी मैथन से संबद्ध हैं और खेल जगत में उन्हें डीवीसी की पीटी उषा के नाम से भी जाना जाता है। प्रतियोगिता के दौरान ही उनके जीवन में एक गहरा व्यक्तिगत आघात आया। कैंसर से पीड़ित उनके पिता का दुर्गापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया। यह सूचना उनके भाई को पहले मिली, लेकिन उन्होंने केवल इतना बताया कि पिता की तबीयत गंभीर है, ताकि प्राणमिता मानसिक रूप से टूटे बिना प्रतियोगिता पूरी कर सकें।

गहरे पारिवारिक शोक और मानसिक पीड़ा के बावजूद प्राणमिता ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। उन्होंने सभी स्पर्धाओं में पूरी ताकत और एकाग्रता के साथ दौड़ लगाई और पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही होता है, जो सबसे कठिन समय में भी हार नहीं मानता। प्रतियोगिता समाप्त होते ही साथियों और अधिकारियों ने उन्हें तुरंत कोलकाता के लिए फ्लाइट से रवाना कराया, जहां से वे अपने पैतृक आवास दुर्गापुर पहुंचीं।

उनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि से पूरे डीवीसी परिवार में गर्व और भावुकता का माहौल है। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उमेश कुमार सहित डीवीसी परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्राणमिता चंद्रा को बधाई दी और उनके दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

शिलांग की इस प्रतियोगिता में देश भर के पीएसयू और सरकारी संस्थानों की मजबूत भागीदारी रही, लेकिन प्राणमिता चंद्रा की कहानी सबसे अलग रही। यह कहानी बताती है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ताकत देता है।