वाराणसी में कांग्रेस का संविधान संवाद सम्मेलन, लोकतांत्रिक मूल्यों पर चर्चा

By
Pradyumn Kant Patel
Pradyumn Kant Patel is the Editorial Staff Manager at News Report, a registered Hindi newspaper. He oversees newsroom operations, editorial workflows, and content quality standards, ensuring...
4 Min Read
वाराणसी के शास्त्रीघाट पर आयोजित कांग्रेस के संविधान संवाद सम्मेलन में शामिल नेता और कार्यकर्ता

वाराणसी के शास्त्रीघाट पर रविवार को कांग्रेस की ओर से संविधान संवाद सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता, नागरिक अधिकारों की रक्षा, धर्मनिरपेक्षता और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। सम्मेलन का उद्देश्य संविधान के मूल मूल्यों को लेकर जनता के बीच संवाद स्थापित करना और मौजूदा परिस्थितियों में लोकतंत्र पर पड़ रहे प्रभावों को सामने लाना रहा। गंगा तट पर आयोजित इस कार्यक्रम में वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों से कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में पहुंचे।

इस सम्मेलन में कांग्रेस के कई सांसद और राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल हुए। प्रमुख रूप से किशोरी लाल शर्मा, तनुज पुनिया, राकेश राठौर, इमरान मसूद और कुंवर उज्जवल रमण सिंह सम्मेलन में मौजूद रहे। इसके साथ ही कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप दिया। वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली और मीरजापुर से आए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन में भाग लेकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर संकट गहराता जा रहा है। नागरिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिशें हो रही हैं और संविधान में निहित मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। नेताओं ने धर्मनिरपेक्षता पर हो रहे हमलों और संघीय ढांचे को कमजोर करने के प्रयासों पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है और इसकी रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में काशी से जुड़े कई स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास के नाम पर रानी अहिल्याबाई की प्रतिमा को हटाए जाने का मामला, प्रयागराज में संत अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए व्यवहार और काशी की धार्मिक आस्था से जुड़े प्रश्नों पर नेताओं ने सरकार से जवाब मांगा। वक्ताओं ने कहा कि काशी की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में यह सम्मेलन केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि काशीवासियों की आवाज को सीधे सरकार तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से अपील की कि यदि लोकतंत्र और संविधान को बचाना है, तो संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि धूप और कठिन परिस्थितियों में भी बैठकर अपनी बात रखना ही लोकतांत्रिक संघर्ष की पहचान है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित करना और उनकी समस्याओं को समझना है। संविधान संवाद सम्मेलन के माध्यम से कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि वह नागरिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और काशी की अस्मिता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वक्ताओं ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में भी इस तरह के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके और संविधान के मूल्यों को जन जन तक पहुंचाया जा सके।