श्रीश्री रविशंकर ने काशी विश्वनाथ धाम में किए दर्शन, विश्व शांति की कामना
अमित मिश्रा की रिपोर्ट : आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर मंगलवार को वाराणसी पहुंचे। अपने दौरे की शुरुआत उन्होंने श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के साथ की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के समक्ष विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की।
मंदिर प्रशासन ने किया विशेष स्वागत
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंचने पर मंदिर प्रशासन की ओर से उनका विशेष स्वागत किया गया। उन्हें पारंपरिक रूप से प्रसाद, अंगवस्त्र और रुद्राक्ष की माला भेंट की गई। यह सम्मान वाराणसी की धार्मिक परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।
एयरपोर्ट से मंदिर तक उनका काफिला विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचा। दर्शन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल देखा गया।
विश्व शांति पर दिया संदेश
दर्शन के बाद श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति की स्थापना के लिए सबसे पहले व्यक्ति को अपने भीतर शांति स्थापित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति आंतरिक रूप से संतुलित और शांत होता है, तभी वह समाज में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार कर सकता है।
अनुयायियों में उत्साह
उनके वाराणसी आगमन से अनुयायियों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन और प्रवचन सुनने के लिए उत्सुक नजर आए। उनका यह दौरा अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
रुद्राक्ष की ओर अगला कार्यक्रम
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में दर्शन के बाद उनका अगला कार्यक्रम रुद्राक्ष परिसर में प्रस्तावित है। रुद्राक्ष का भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में विशेष महत्व है और इसे साधना तथा ध्यान से जोड़ा जाता है।
समाज में सकारात्मकता का संदेश
श्रीश्री रविशंकर का यह दौरा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके विचार और शिक्षाएं समाज में शांति, संतुलन और सकारात्मकता का संदेश देती हैं।
उनके इस प्रवास से वाराणसी की आध्यात्मिक पहचान को भी मजबूती मिलती है और देश-विदेश के लोगों के बीच भारतीय संस्कृति का संदेश प्रसारित होता है।
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