पूर्वांचल में टीबी रोगियों को दी जाने वाली पोषण सहायता राशि में गंभीर लापरवाही सामने आई है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत प्रदेश सरकार द्वारा जारी की जाने वाली मासिक सहायता कई जिलों के मरीजों तक नहीं पहुंच पाई है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 से 2024 के बीच स्वीकृत 17.89 करोड़ रुपये की राशि अब तक मरीजों के खातों में नहीं भेजी गई है। वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर और चंदौली सहित दस जिलों में हजारों टीबी मरीज पांच महीनों से पोषण भत्ता न मिलने के कारण परेशान हैं। नई व्यवस्था एसएनए स्पर्श पोर्टल में अपडेशन की धीमी प्रक्रिया के कारण भुगतान रुक गया है। पहले यह भुगतान पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से किया जाता था।
राशि के अटकने का सबसे अधिक प्रभाव उन मरीजों पर पड़ा है जिनकी आय सीमित है और जिनके लिए एक हजार रुपये की मासिक सहायता पौष्टिक आहार का प्रमुख साधन थी। लंबे उपचार काल में पोषण का सही स्तर बनाए रखना जरूरी होता है, लेकिन भुगतान रुकने से कई मरीज आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। केवल वाराणसी जिले में 5,883 मरीजों की 2.94 करोड़ रुपये की राशि लंबित है, जबकि बलिया में 4,359 मरीजों की 2.17 करोड़ रुपये और आजमगढ़ में 4,200 मरीजों की 2.10 करोड़ रुपये की सहायता अटकी हुई है। इसी तरह जौनपुर, चंदौली, सोनभद्र, मीरजापुर, भदोही, मऊ और गाजीपुर जिलों में भी बड़ी संख्या में मरीजों की किस्तें नहीं पहुंची हैं।
जिलों के मरीजों ने बताया कि दवाएं तो अस्पताल और डॉट्स केंद्र से मिल जाती हैं, लेकिन पोषण राशि महीनों से नहीं मिली। कई मरीजों ने कहा कि पोर्टल सही होने के बाद एक मुश्त राशि भेजने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन लगातार देरी से उन्हें परेशानी बढ़ती जा रही है। सोनभद्र, चंदौली, जौनपुर और मऊ के मरीजों ने बताया कि दवा तो नियमित मिल रही है लेकिन सहायता राशि के अभाव में दवाओं के साथ जरूरी पौष्टिक भोजन जुटाना मुश्किल होता जा रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि उपचार शुरू होने के तीन महीने बाद भी पहली किस्त नहीं मिली। वाराणसी की एक महिला मरीज ने कहा कि छह महीने से उपचार चल रहा है, दवाएं लेकर भी खांसी कम नहीं हुई और आर्थिक सहायता न मिलने से घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने बताया कि यह मामला सेंट्रल टीबी डिवीजन के क्षेत्राधिकार में आता है और एसएनए स्पर्श पोर्टल को अपडेट करने का काम वहीं से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही लंबित भुगतान मरीजों को भेजे जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को आशंका है कि सहायता न मिलने से टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति प्रभावित हो सकती है क्योंकि पोषण की कमी से मरीजों में दवा प्रतिरोध बढ़ने का खतरा रहता है।
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियमित दवा, पौष्टिक आहार और समय पर सहायता राशि का मिलना बेहद आवश्यक है। पूर्वांचल के दस जिलों में लगभग 37 हजार मरीज वित्तीय सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनकी स्थिति इस बात को उजागर करती है कि तकनीकी खामियों ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बड़ी बाधा पैदा कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या के समाधान के बाद सभी लंबित भुगतान एक साथ भेजे जाएंगे, लेकिन तब तक मरीजों की चिंता बनी रहेगी।
पूर्वांचल के टीबी मरीजों को नहीं मिली पोषण राशि, करोड़ों रुपये अटके

पूर्वांचल में हजारों टीबी मरीजों को पाँच महीने से पोषण सहायता नहीं मिली है, नई पोर्टल व्यवस्था के कारण करोड़ों रुपये अटके।
Category: uttar pradesh health government scheme
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