यूपी विधानसभा: विधायकों के फोन न उठाने वाले अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई

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Sandeep Srivastava
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में अधिकारियों के रवैये पर चर्चा करते हुए विधायक।

विधायकों के फोन नहीं उठाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के कार्यवाही के दौरान मंगलवार को अधिकारियों द्वारा विधायकों की बात नहीं सुनने और फोन कॉल का उत्तर नहीं देने का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने नियम 300 के अंतर्गत इस विषय को उठाते हुए कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को उत्तरदायी बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाई गई

विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को अवगत कराया कि कार्यपालिका द्वारा विधायिका और न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप से जुड़ी सूचनाएं संविधान के प्रावधानों के संदर्भ में गंभीर मानी जाती हैं। सदन में हुई चर्चा से यह तथ्य सामने आया कि अधिकारियों के स्तर पर विधायकों को सहयोग नहीं दिया जा रहा है जो संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। अध्यक्ष ने कहा कि यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है और इससे संस्थाओं के बीच संतुलन प्रभावित होता है।

सरकार की जिम्मेदारी और शासनादेशों का पालन

संसदीय कार्य मंत्री ने इस संदर्भ में यह स्वीकार किया कि पूर्व में जारी शासनादेशों का समुचित पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। सदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि संविधान के अनुच्छेद 164 2 के अंतर्गत मंत्री परिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। ऐसे में किसी विधायक द्वारा जनहित से जुड़े कार्यों के लिए अधिकारियों से संपर्क किए जाने पर सम्मान और समय दिया जाना अनिवार्य है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ अधिकारियों को दंडित भी किया गया है। दंड की स्थिति यह दर्शाती है कि अधिकारियों का आचरण संवैधानिक योजना के अनुरूप नहीं पाया गया। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि आगे ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इसके लिए प्रशासन को सतर्क रहना होगा। यदि भविष्य में भी विधायकों की बात अनसुनी की जाती है तो सदन के पास कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

लोकतांत्रिक संतुलन और अराजकता का खतरा

अध्यक्ष ने सदन में कहा कि शासन द्वारा विधायिका को मजबूत करने की पहल की जाती है लेकिन कुछ अधिकारियों के स्तर पर सजग होकर आदेशों का अनुपालन कराना आवश्यक है। कार्यपालिका न्यायपालिका और विधायिका एक दूसरे की पूरक हैं। यदि लोकतांत्रिक संतुलन बिगड़ता है तो अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है जिसे आगे चलकर संभालना कठिन होगा। उन्होंने सदस्यों से भी अपेक्षा जताई कि वे कार्यपालिका और न्यायपालिका की मर्यादा का सम्मान करें और जनहित को प्राथमिकता दें।

जारी होंगे कड़े निर्देश

विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया कि इस मामले में सभी विभागों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए जाएं। पूर्व में कई बार जारी शासनादेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। शासनादेश का पालन न करना अधिकारियों की सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा। अनुपालन नहीं करने वालों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। यह संदेश दिया गया कि जनप्रतिनिधियों से संवाद और सहयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।