आर्मी अफसर बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी: एसटीएफ ने गिरोह के सरगना को दबोचा
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को वाराणसी में बड़ी सफलता हाथ लगी है। आर्मी अधिकारी बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवकों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एसटीएफ ने इसके सरगना धर्मेंद्र पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी सोमवार देर रात भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित विभूति इन्क्लेव अपार्टमेंट, बृज इन्क्लेव कॉलोनी के पास से की गई।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि
गिरफ्तार आरोपी धर्मेंद्र पांडेय चंदौली जिले के अलीनगर थाना क्षेत्र के कैली गांव का निवासी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह लंबे समय से फर्जी पहचान बनाकर विभिन्न विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी कर रहा था। आरोपी खुद को भारतीय सेना की इंटेलिजेंस शाखा में तैनात कमांडिंग ऑफिसर यानी कर्नल बताकर लोगों का विश्वास जीतता था।
गिरफ्तारी का स्थान, समय और कार्रवाई
एसटीएफ वाराणसी इकाई को मिलिट्री इंटेलिजेंस से इस गिरोह के सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ वाराणसी के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी।
सोमवार देर रात सटीक सूचना मिलने पर एसटीएफ टीम ने भेलूपुर थाना क्षेत्र के विभूति इन्क्लेव अपार्टमेंट के पास घेराबंदी कर धर्मेंद्र पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बरामदगी: फर्जी दस्तावेजों का जाल
तलाशी के दौरान आरोपी के पास से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। इनमें शामिल हैं:
– 2 मोबाइल फोन
– 3 आधार कार्ड (अलग-अलग नंबरों के)
– 3 पैन कार्ड (अलग-अलग नंबरों के)
– 2 ड्राइविंग लाइसेंस (भिन्न पते से जारी)
– 3 एटीएम कार्ड
– अन्य व्यक्तियों के हाईस्कूल अंकपत्र और प्रमाणपत्र
– भारतीय सेना के 2 फर्जी आईडी कार्ड
बरामद दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और विभिन्न बैंक खातों के संचालन के लिए कई फर्जी पहचान तैयार कर रखी थी।
ठगी का तरीका: भरोसा जीतकर लाखों की वसूली
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि वह खुद को आर्मी इंटेलिजेंस का कर्नल बताकर युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देता था। वह सेना, रेलवे, शिक्षा विभाग और अर्द्धसैनिक बलों में भर्ती कराने का दावा करता था। इस भरोसे के आधार पर वह बेरोजगार युवकों से मोटी रकम वसूलता था।
धर्मेंद्र पांडेय ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में जमा करता था, जो फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए खुलवाए गए थे। जब पीड़ित नौकरी के बारे में पूछते, तो वह उन्हें दूसरे विभाग में नियुक्ति दिलाने का झांसा देकर समय टालता रहता था।
अपराधिक इतिहास और धाराएं
पुलिस आरोपी के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि वह पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। भेलूपुर थाना में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं शामिल हैं।
एसटीएफ टीम की भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में एसटीएफ वाराणसी इकाई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने मिलिट्री इंटेलिजेंस से प्राप्त इनपुट के आधार पर सूचनाओं का विश्लेषण किया और आरोपी की लोकेशन ट्रैक कर उसे गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश की जा रही है और संभावना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जनता के लिए चेतावनी और सलाह
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह कितने सक्रिय हैं। आम नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंट के माध्यम से नौकरी पाने के लालच में न आएं। सरकारी नौकरियों के लिए केवल आधिकारिक प्रक्रियाओं और मान्यता प्राप्त माध्यमों का ही उपयोग करें।
एसटीएफ की यह कार्रवाई न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि ऐसे ठगों के लिए सख्त संदेश भी है कि कानून से बचना संभव नहीं है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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