वाराणसी: धार्मिक नगरी काशी में एक बार फिर कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला गंभीर मामला सामने आया है। शहर के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत सेंट्रल जेल रोड स्थित कुंजविहार कॉलोनी में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठित सेक्स रैकेट का खुलासा किया है। एसओजी-2 और कैंट पुलिस की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध छापेमारी कर चार युवतियों और एक युवक को मौके से गिरफ्तार किया, जबकि रैकेट का मुख्य संचालक और उसकी पत्नी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस को काफी समय से कुंजविहार कॉलोनी में अनैतिक गतिविधियों की गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं। लगातार निगरानी और सूचना की पुष्टि के बाद एसओजी-2 की टीम ने छापेमारी की रणनीति बनाई। जैसे ही पुलिस टीम रिहायशी मकान में पहुंची, वहां मौजूद युवतियां और एक ग्राहक पुलिस को देखकर भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें दौड़ाकर पकड़ लिया। मौके की संवेदनशीलता को देखते हुए महिला पुलिस को बुलाया गया, जिसके बाद सभी युवतियों को थाने ले जाया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से आपत्तिजनक सामग्री के साथ-साथ एक चार पहिया वाहन भी बरामद किया है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस वाहन का उपयोग ग्राहकों की आवाजाही और रैकेट से जुड़ी अन्य गतिविधियों में किया जाता था। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया है कि यह सेक्स रैकेट सिद्धार्थ राजपुरिया और उसकी पत्नी पायल राजपुरिया द्वारा संचालित किया जा रहा था। दोनों ने सेंट्रल जेल रोड की कॉलोनी में किराए पर मकान लेकर वहां देह व्यापार का नेटवर्क खड़ा किया था। लड़कियों को प्रशिक्षण या काम दिलाने के बहाने बुलाया जाता था और फिर उन्हें इस धंधे में धकेल दिया जाता था। पुलिस दबिश के दौरान सिद्धार्थ और उसकी पत्नी फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
इस मामले में संचालक की साली, प्रयागराज निवासी रेहा श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया है। वहीं पकड़ी गई तीन अन्य युवतियां पश्चिम बंगाल की रहने वाली बताई जा रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इन युवतियों को किन माध्यमों से वाराणसी लाया गया और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार किए गए युवक की पहचान राहुल जायसवाल के रूप में हुई है, जो मलदहिया स्थित नील कॉटेज का निवासी है और एसबीआई की कैंट रेलवे स्टेशन शाखा में क्लर्क के पद पर तैनात है। सभी आरोपियों को कैंट थाने लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने बताया कि पूछताछ के बाद उनके परिजनों को भी सूचना दी जाएगी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि संचालिका ग्राहकों से प्रति ग्राहक करीब 3000 रुपये वसूलती थी, जबकि युवतियों को केवल 1000 रुपये दिए जाते थे। यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय है।
एसीपी कैंट नितिन तनेजा ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। बरामद साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है। वहीं एसीपी मुख्यालय अपूर्व पांडेय ने कहा कि पुलिस इस पूरे सिंडीकेट की जड़ तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है और फरार संचालकों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
फिलहाल पुलिस मकान मालिक की भूमिका की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसे इस अवैध गतिविधि की जानकारी थी या नहीं। वाराणसी पुलिस का कहना है कि इस तरह की अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
