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वाराणसी: सिसवां गांव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, कार्रवाई में देरी से शिकायतकर्ता परेशान

वाराणसी: सिसवां गांव में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, कार्रवाई में देरी से शिकायतकर्ता परेशान

वाराणसी के सिसवां गांव में सरकारी नवीन परती भूमि पर अवैध दो मंजिला मकान बना, शिकायत के बावजूद कार्रवाई अधूरी।

वाराणसी: पिंडरा विकासखंड के सिसवां गांव में सरकारी नवीन परती भूमि पर अवैध कब्जे का मामला लगातार चर्चा में है। शिकायत के अनुसार गांव की आराजी संख्या 353, रकबा 0.0120 हेक्टेयर पर नितेश दुबे नामक व्यक्ति ने दो मंजिला मकान बनाकर कब्जा कर लिया है। यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में नवीन परती के रूप में दर्ज है, जिस पर किसी तरह के निजी निर्माण की अनुमति नहीं है। शिकायतकर्ता मनोज कुमार पाण्डेय के पुत्र ऋषभ पाण्डेय ने बताया कि इस कब्जे के खिलाफ उन्होंने कई बार शिकायत की लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।

ऋषभ पाण्डेय की शिकायत के बाद स्थानीय लेखपाल ने मौके पर जांच की थी और अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की थी कि निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया है। लेखपाल ने यह भी बताया था कि इस मामले में धारा 67 के तहत स्थानीय प्रशासन की ओर से कार्रवाई शुरू कर दी गई थी और अवैध निर्माण पर नोटिस भी चस्पा किया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरी प्रक्रिया केवल कागजों तक सीमित रह गई है और मौके पर किसी तरह की रोकथाम या कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि न तो रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई और न ही भूमि को कब्जे से मुक्त कराने का कोई कदम उठाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय द्वारा इस जमीन पर निर्माण से संबंधित कोई स्थगन आदेश भी जारी नहीं है, इसके बावजूद कार्रवाई लंबित बनी हुई है। इससे गांव में कई लोगों के बीच इस बात को लेकर असंतोष है कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण लगातार बढ़ते जा रहे हैं और उन पर समय पर रोक नहीं लगाई जा रही।

स्थिति को देखते हुए ऋषभ पाण्डेय ने जिलाधिकारी वाराणसी, उप जिलाधिकारी पिंडरा और आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई है ताकि मामले को गंभीरता से लिया जाए। जब इस संबंध में लेखपाल शुभम पाण्डेय से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि उक्त आराजी से जुड़ा मामला तहसीलदार न्यायालय में दर्ज कर दिया गया है और प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले को जल्द सुलझाकर भूमि को सरकारी रिकॉर्ड के अनुरूप मुक्त कराना आवश्यक है।

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