केंद्र सरकार के 8th Central Pay Commission को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सैलरी और पेंशन में संभावित बढ़ोतरी से पहले आयोग ने अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भर्ती आयोग के औपचारिक रूप से पूरी तरह कार्य शुरू करने से पहले की तैयारी मानी जा रही है ताकि वेतन ढांचे भत्तों और पेंशन से जुड़े अहम प्रस्तावों पर बिना देरी के काम शुरू किया जा सके।
आठवें वेतन आयोग में प्रतिनियुक्ति के आधार पर कुल छह पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर सीनियर प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी और प्राइवेट सेक्रेटरी जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। आयोग के अनुसार पीएसओ के दो पद भरे जा सकते हैं। इन पदों के लिए वेतन स्तर लेवल 13 से लेकर लेवल 8 या 10 तक निर्धारित किया गया है जो पद की प्रकृति पर निर्भर करेगा।
इन पदों के लिए केंद्र सरकार के अधिकारी पात्र हैं जबकि आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों पर भी विचार किया जा सकता है। अभ्यर्थियों के लिए समान पद पर नियमित सेवा या निर्धारित वर्षों का अनुभव होना आवश्यक है। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री तय की गई है।
आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ईमेल के माध्यम से रखी गई है। इच्छुक अधिकारी निर्धारित प्रोफार्मा में अपना आवेदन भेज सकते हैं। आवेदन के साथ पिछले पांच वर्षों की एपीएआर विजिलेंस क्लियरेंस और काडर क्लियरेंस अनिवार्य रूप से संलग्न करनी होगी। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि 5 फरवरी 2026 तय की गई है और आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन समय सीमा के भीतर पहुंच जाना चाहिए।
यह नियुक्तियां प्रतिनियुक्ति आधार पर होंगी और चयन प्रक्रिया कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के नियमों के अनुसार की जाएगी। चयनित अधिकारी आयोग के पूरे कार्यकाल तक अपनी सेवाएं देंगे। हालांकि आवेदन प्रक्रिया को ओपन एंडेड बताया गया है लेकिन तय तारीख तक आवेदन भेजना जरूरी होगा।
गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग को नई दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में कार्यालय आवंटित कर दिया गया है। जैसे ही यह कार्यालय पूरी तरह कार्यशील होगा आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े वेतन पेंशन और भत्तों के अहम मुद्दों पर काम शुरू कर देगा। लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस प्रक्रिया पर टिकी हैं क्योंकि आने वाले समय में उनके वेतन ढांचे को तय करने में इसी आयोग की भूमिका निर्णायक होगी।
