पद्मश्री प्रो टीके लहरी को आईसीयू में थप्पड़ मारने का आरोप बीएचयू में मेडिकल बोर्ड गठित
वाराणसी। बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में करीब आठ महीने से भर्ती कार्डियोथोरेसिक विभाग के 85 वर्षीय इमेरिटस प्रोफेसर और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित प्रोफेसर टीके लहरी के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत के अनुसार 29 अगस्त की रात कार्डियोथोरेसिक विभाग के आईसीयू में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अरविंद पांडेय ने प्रोफेसर टीके लहरी को कथित तौर पर गाली दी और थप्पड़ मारा। परिजनों का दावा है कि घटना में प्रोफेसर लहरी के चेहरे और एक आंख में चोट आई है। आंख पूरी तरह लाल होने की बात भी कही गई है। मामला बीएचयू के कुलपति तक पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कर दिया है।
29 अगस्त की रात आईसीयू में घटना का आरोप
प्रोफेसर टीके लहरी 27 जनवरी 2026 से बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि 29 अगस्त की रात सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक के पांचवें तल पर स्थित कार्डियोथोरेसिक विभाग के आईसीयू में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें इस घटना की जानकारी विभाग के ही एक डॉक्टर के माध्यम से एक सितंबर को मिली। इसके बाद परिवार की ओर से बीएचयू के कुलपति आईएमएस बीएचयू के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई। शिकायत के साथ प्रोफेसर लहरी को चोट लगने से संबंधित फोटो और वीडियो भी उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।
परिजनों ने मेडिकल जांच और पुलिस कार्रवाई की चेतावनी दी
परिजनों ने शिकायत में प्रोफेसर टीके लहरी की मेडिकल जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उन्हें किसी तरह की अंदरूनी चोट तो नहीं लगी है। परिवार की ओर से मामले में पुलिस कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। परिजनों का कहना है कि इतने वरिष्ठ और उम्रदराज चिकित्सक के साथ यदि आईसीयू में इस तरह की घटना हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि घटना के पीछे कथित रूप से क्या कारण था और एसोसिएट प्रोफेसर किस बात से नाराज थे यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
बीएचयू प्रशासन ने गठित किया मेडिकल बोर्ड
परिजनों की शिकायत मिलने के बाद बीएचयू प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक ने आईसीयू में जाकर प्रोफेसर टीके लहरी का हाल जाना। मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। बोर्ड के सदस्य शनिवार को आईसीयू पहुंचे और प्रोफेसर लहरी की स्थिति तथा पूरे मामले से संबंधित तथ्यों की छानबीन की। प्रशासन की ओर से बताया गया है कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट जल्द मिलने की उम्मीद है। इसके बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
चिकित्सा अधीक्षक बोले प्रथम दृष्टया आरोप सही नहीं लग रहे
बीएचयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर पुनीत कुमार ने कहा कि परिजनों की ओर से ईमेल के माध्यम से शिकायत मिली है। आईएमएस निदेशक के साथ वार्ड में जाकर प्रोफेसर टीके लहरी को देखा गया है। मामले में मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है और बोर्ड के सदस्य आईसीयू में जाकर छानबीन कर चुके हैं। चिकित्सा अधीक्षक के अनुसार पिटाई के आरोप प्रथम दृष्टया सही नहीं लग रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ अरविंद पांडेय ही प्रोफेसर लहरी की लगातार सेवा कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आरोपी एसोसिएट प्रोफेसर का पक्ष नहीं मिल सका
मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अरविंद पांडेय का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्हें फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन समाचार तैयार किए जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में मामले में उनके पक्ष को भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण माना जाएगा। फिलहाल एक तरफ परिजनों की ओर से मारपीट और चोट के गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो दूसरी तरफ बीएचयू प्रशासन की ओर से प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि नहीं होने की बात कही गई है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी।
परिजनों का आरोप बीएचयू प्रशासन ने नहीं दी जानकारी
प्रोफेसर टीके लहरी के परिवार के सदस्य कोलकाता में रहते हैं। परिजनों के मुताबिक उन्हें प्रोफेसर लहरी के साथ थप्पड़ मारने और दुर्व्यवहार की जानकारी विभाग के एक डॉक्टर के माध्यम से मिली। परिवार का कहना है कि इस संबंध में बीएचयू प्रशासन की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रोफेसर लहरी की बीमारी की जानकारी भी समय पर बीएचयू प्रशासन तक नहीं पहुंच सकी थी। परिवार के मुताबिक प्रोफेसर लहरी करीब 15 दिनों तक अपने घर में बिस्तर पर पड़े रहे। इसके बाद मामले को लेकर खबर सामने आने पर उन्हें बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनका इलाज शुरू हुआ।
2003 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी ओपीडी में देखते रहे मरीज
प्रोफेसर टीके लहरी का बीएचयू से लंबे समय का संबंध रहा है। कोलकाता में 3 जनवरी 1941 को जन्मे डॉ लहरी आईएमएस बीएचयू से वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे। हालांकि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने मरीजों की सेवा जारी रखी। बताया जाता है कि वह लंबे समय तक अपने घर से पैदल सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओपीडी पहुंचते और मरीजों को देखते रहे। एप्रन पहने एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में काला बैग लिए उन्हें नरिया गेट से एनसीसी बटालियन वाली लेन और कुलपति आवास के सामने से सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की ओर जाते देखा जाता था। वर्तमान में वह करीब आठ महीने से आईसीयू में भर्ती हैं और चिकित्सकों की टीम उनका इलाज कर रही है।
कई वर्तमान चिकित्सकों को पढ़ा चुके हैं प्रोफेसर लहरी
प्रोफेसर टीके लहरी का योगदान केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं रहा है। बीएचयू में वर्तमान समय में विभागाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत चिकित्सकों को भी प्रोफेसर लहरी द्वारा पढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की सेवा में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण बीएचयू के चिकित्सा क्षेत्र में उनका विशेष स्थान माना जाता है। ऐसे में उनके साथ कथित मारपीट का आरोप सामने आने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है।
2006 में मिला था पद्मश्री सम्मान
प्रोफेसर टीके लहरी को मरीजों की सेवा और चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2006 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। उनके बारे में यह भी बताया जाता है कि वह अपनी पेंशन का बड़ा हिस्सा विभिन्न संस्थानों को दान कर देते हैं। जरूरतमंदों की मदद करने और चिकित्सा सेवा के प्रति उनके समर्पण के कई उदाहरण सामने आते रहे हैं। वह स्वयं किसी से मदद लेने से बचते हैं और मदद का प्रस्ताव मिलने पर उसे स्वीकार नहीं करते हैं।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल बीएचयू अस्पताल में भर्ती पद्मश्री प्रोफेसर टीके लहरी से कथित मारपीट का मामला जांच के दायरे में है। परिजनों ने थप्पड़ मारने और चोट लगने का आरोप लगाया है जबकि बीएचयू के चिकित्सा अधीक्षक ने प्रथम दृष्टया पिटाई के आरोप सही नहीं लगने की बात कही है। मेडिकल बोर्ड के सदस्य आईसीयू जाकर मामले की छानबीन कर चुके हैं। अब बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रोफेसर लहरी को किस प्रकार की चोट लगी और 29 अगस्त की रात आईसीयू में वास्तव में क्या हुआ था। जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
LATEST NEWS