वाराणसी के चौसठी घाट में पुराने होटल का पिछला हिस्सा ढहा
वाराणसी: चौसठी घाट क्षेत्र में शनिवार रात करीब दस बजे बारिश के दौरान एक पुराने और लंबे समय से बंद होटल का पिछला हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसा दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के चौसठी घाट स्थित होटल ओंकार पैलेस डी 22 10 में हुआ। होटल के मालिक के रूप में विजय द्विवेदी का नाम सामने आया है। भवन का पिछला हिस्सा गिरने के बाद आसपास के इलाके में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय होटल के भीतर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके कारण हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।
बारिश के बीच अचानक गिरी दो मंजिला दीवार
स्थानीय लोगों के अनुसार होटल काफी पुराना था और लंबे समय से बंद पड़ा हुआ था। भवन का पिछला हिस्सा पहले से ही जर्जर स्थिति में बताया जा रहा था। होटल का यह हिस्सा गंगा नदी के किनारे पांडे घाट से सटे क्षेत्र में दिगपतिया घाट की दिशा में बना हुआ था। बताया गया कि भवन का पिछला हिस्सा दो मंजिला था। शनिवार रात क्षेत्र में बारिश हो रही थी। इसी दौरान अचानक भवन की पिछली दीवार भरभराकर नीचे गिर गई। दीवार गिरने से बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आ गया। अचानक तेज आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग घटनास्थल की ओर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कुछ समय के लिए इलाके में लोगों के बीच चिंता का माहौल रहा।
लंबे समय से बंद था होटल
जानकारी के अनुसार होटल काफी समय से बंद था और भवन की स्थिति भी खराब बताई जा रही थी। होटल में पर्यटकों या कर्मचारियों के मौजूद नहीं होने के कारण बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि घटना के समय भवन के अंदर लोग मौजूद होते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। फिलहाल हादसे के बाद भवन के आसपास सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। क्षतिग्रस्त हिस्से और मौके पर मौजूद मलबे की स्थिति का निरीक्षण किया गया है। भवन को हुए नुकसान का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है।
पास के गेस्ट हाउस में चल रहा था निर्माण कार्य
भवन गिरने की वजह को लेकर फिलहाल जांच की जरूरत है। बताया गया है कि होटल के ठीक पास स्थित एक गेस्ट हाउस में पिछले कुछ समय से निर्माण कार्य चल रहा था। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि निर्माण कार्य के कारण पहले से जर्जर भवन की नींव और दीवारों पर दबाव पड़ा हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी अधिकारी की ओर से ऐसी कोई पुष्टि नहीं की गई है कि निर्माण कार्य ही भवन गिरने की निश्चित वजह था। लगातार हो रही बारिश को भी भवन की स्थिति प्रभावित करने वाले संभावित कारण के रूप में देखा जा रहा है। वास्तविक कारण तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसलिए फिलहाल किसी एक कारण को हादसे की निश्चित वजह मानना उचित नहीं होगा।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची दशाश्वमेध थाना पुलिस
भवन का पिछला हिस्सा गिरने की सूचना मिलने के बाद दशाश्वमेध थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास की स्थिति का जायजा लिया। जर्जर भवन और मलबे को देखते हुए स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने तथा क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास नहीं जाने की सलाह दी गई। पुलिस ने मौके की स्थिति पर नजर रखी और आवश्यक कार्रवाई की। थानाध्यक्ष दशाश्वमेध की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट भेजकर घटना की जानकारी दी गई। हादसे में किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है।
पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा का सवाल
चौसठी घाट और इसके आसपास का क्षेत्र वाराणसी के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में शामिल है। गंगा किनारे होने के कारण इस क्षेत्र में लंबे समय से बने कई पुराने भवन मौजूद हैं। इनमें से कुछ भवन लंबे समय से बंद भी बताए जाते हैं। ऐसे भवनों की जर्जर स्थिति बारिश के दौरान सुरक्षा का विषय बन जाती है। होटल ओंकार पैलेस के पिछले हिस्से के गिरने की घटना ने एक बार फिर पुराने भवनों की स्थिति की जांच और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है। खासकर बारिश के दौरान कमजोर दीवारों और नींव पर पड़ने वाले दबाव को लेकर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता रहती है।
जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वास्तविक वजह
फिलहाल इस घटना में सबसे राहत की बात यह है कि पुराने होटल का पिछला हिस्सा गिरने के बावजूद किसी व्यक्ति की जान नहीं गई और किसी के घायल होने की सूचना भी नहीं है। पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर आसपास के लोगों को सतर्क किया है। भवन की जर्जर स्थिति और पास में चल रहे निर्माण कार्य को देखते हुए घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर भवन की स्थिति तथा आसपास चल रहे निर्माण कार्य का विस्तृत परीक्षण किया जाता है तो हादसे के कारणों को समझने में मदद मिल सकती है। वाराणसी के चौसठी घाट में हुई इस घटना के बाद पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है।
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