सप्तसागर दवा मंडी में सत्यापन के लिए पहुंची यूपी एफएसडीए टीम
वाराणसी: प्रमुख दवा मंडी सप्तसागर में बुधवार को उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम दवा दुकानों के लाइसेंस के विशेष सत्यापन के लिए पहुंची। विभागीय टीम ने मंडी में संचालित दवा प्रतिष्ठानों के लाइसेंस और उनके वर्तमान संचालन की स्थिति की जानकारी जुटाई। टीम के पहुंचने के बाद कुछ समय के लिए दुकानदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रही। बाद में दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने दुकानदारों से समन्वय करते हुए विभागीय टीम के साथ एक एक दुकान का सत्यापन कराया।
सत्यापन अभियान के दौरान कई दुकानें बंद मिलीं। विभागीय रिकॉर्ड में इन प्रतिष्ठानों से जुड़े कुछ लाइसेंस संदिग्ध या निष्क्रिय स्थिति में दर्ज बताए गए हैं। विभाग की ओर से यह देखा जा रहा है कि संबंधित लाइसेंस के आधार पर वास्तव में उसी पते पर दवा का कारोबार संचालित हो रहा है या नहीं। बंद दुकानों और लंबे समय से कारोबार नहीं कर रहे प्रतिष्ठानों के संबंध में विभाग आगे की कार्रवाई के लिए जानकारी एकत्र कर रहा है।
निष्क्रिय दवा लाइसेंसों का हो रहा सत्यापन
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य ऐसे दवा लाइसेंसों को चिह्नित करना है जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं या जिनका वर्तमान में उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे दंडात्मक जांच के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह दवा लाइसेंसों की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए चलाया जा रहा नियमित सत्यापन अभियान है। समिति की ओर से भी विभागीय टीम को आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।
सत्यापन के दौरान विभागीय अधिकारियों का मुख्य ध्यान लाइसेंस में दर्ज पते और वहां मौजूद वास्तविक कारोबार की स्थिति पर रहा। यदि कोई दुकान लंबे समय से बंद है और संबंधित लाइसेंस का कहीं अन्य स्थान पर भी उपयोग नहीं हो रहा है तो विभाग रिकॉर्ड के अनुसार उस लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। वहीं यदि व्यापारी ने अपना कारोबार किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया है तो लाइसेंस की वर्तमान स्थिति और स्थानांतरण संबंधी जानकारी की भी जांच की जाएगी।
कोडीन सिरप के दुरुपयोग को लेकर भी जांच पर जोर
संजय सिंह ने बताया कि हाल के दिनों में कोडीन सिरप के दुरुपयोग और अवैध बिक्री से जुड़े मामले सामने आने के बाद निष्क्रिय दवा लाइसेंसों की स्थिति की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुसार बंद या निष्क्रिय दुकानों के लाइसेंस यदि रिकॉर्ड में सक्रिय बने रहते हैं तो उनके गलत इस्तेमाल की आशंका बनी रह सकती है। ऐसे में विभाग की ओर से लाइसेंस की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जा रहा है।
दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि वैध रूप से कारोबार करने वाले दवा विक्रेताओं के लिए लाइसेंस और प्रतिष्ठान का रिकॉर्ड सही स्थिति में रहना आवश्यक है। निष्क्रिय प्रतिष्ठानों के लाइसेंस का इस्तेमाल किसी अन्य स्थान पर होने की स्थिति में नियामकीय व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से लंबे समय से बंद दुकानों और उनके लाइसेंस की स्थिति स्पष्ट करने पर जोर दिया जा रहा है।
सप्तसागर दवा मंडी में 30 से 35 दुकानें चिह्नित
विशेष सत्यापन अभियान के शुरुआती चरण में सप्तसागर दवा मंडी में करीब 30 से 35 ऐसी दुकानें चिह्नित किए जाने की जानकारी सामने आई है जो लंबे समय से बंद बताई जा रही हैं। संजय सिंह के अनुसार कई व्यापारी अपनी दुकानें खाली कर दूसरे स्थान पर चले गए हैं लेकिन उनके दवा लाइसेंस अभी भी पुराने पते पर दर्ज हैं। ऐसे मामलों में विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि संबंधित लाइसेंस को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है या नहीं।
विभागीय सत्यापन के बाद ही प्रत्येक लाइसेंस की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि किसी लाइसेंस का वर्तमान में कहीं भी उपयोग नहीं हो रहा है और संबंधित प्रतिष्ठान लंबे समय से बंद है तो उसे रिकॉर्ड से हटाने या निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि कोई व्यापारी वैध रूप से दूसरे स्थान पर कारोबार कर रहा है तो उसके लाइसेंस संबंधी दस्तावेजों और स्थान की स्थिति के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
दवा कारोबार में रिकॉर्ड दुरुस्त करने पर जोर
सप्तसागर दवा मंडी में चलाया गया यह सत्यापन अभियान दवा कारोबार से जुड़े लाइसेंस रिकॉर्ड को अद्यतन करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। विभाग की कोशिश है कि रिकॉर्ड में वही प्रतिष्ठान सक्रिय रहें जहां वास्तव में दवा का कारोबार संचालित हो रहा है। बंद हो चुकी दुकानों और निष्क्रिय लाइसेंसों की पहचान से विभाग को अपने रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। साथ ही दवा कारोबार से जुड़े लाइसेंस के संभावित दुरुपयोग की स्थिति को भी रोका जा सकेगा।
दवा विक्रेता समिति ने भी सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग की बात कही है। बुधवार को टीम के पहुंचने के बाद दुकानदारों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को समिति के पदाधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर दूर किया। इसके बाद दुकानों का सत्यापन कराया गया। अभियान के दौरान चिह्नित प्रतिष्ठानों के संबंध में विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने लाइसेंस वास्तव में निष्क्रिय हैं और कितने मामलों में लाइसेंस को निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि
वाराणसी की सप्तसागर दवा मंडी शहर के प्रमुख दवा कारोबार क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में दवा विक्रेता और थोक कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। ऐसे में दवा लाइसेंस की स्थिति और प्रतिष्ठानों के वास्तविक संचालन का रिकॉर्ड दवा कारोबार की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष सत्यापन अभियान के तहत विभाग द्वारा बंद और निष्क्रिय बताए जा रहे प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार अभियान के शुरुआती चरण में सप्तसागर दवा मंडी में 30 से 35 संदिग्ध या बंद प्रतिष्ठान चिह्नित किए गए हैं। इन सभी मामलों में विभागीय सत्यापन के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
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