साझा संस्कृति मंच ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, वाराणसी में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा मांग पत्र
वाराणसी। निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर साझा संस्कृति मंच ने सवाल उठाए हैं। मंच की ओर से इन विषयों को लेकर राष्ट्रपति महोदया के नाम पांच सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत करने की मांग की गई है। मांग पत्र जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित किया जाएगा। मंच ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना जरूरी है और मतदाता सूची तैयार करने तथा उसमें संशोधन करने की प्रक्रिया पारदर्शी एवं निष्पक्ष होनी चाहिए। संगठन ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने और प्रभावित नागरिकों को उचित जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
मतदाता सूची में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
साझा संस्कृति मंच का कहना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना प्रत्येक पात्र नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान किसी नागरिक का नाम हटाए जाने की स्थिति में निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए। मंच ने मांग की है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई पारदर्शी हो और प्रभावित व्यक्ति को इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही नागरिक को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का उचित अवसर भी मिलना चाहिए।
मंच ने निर्वाचन प्रक्रिया में नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही को आवश्यक बताया। संगठन के अनुसार मतदाता सूची में संशोधन से संबंधित निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि पात्र नागरिक अपने नाम की स्थिति जान सकें और जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज करा सकें। मंच ने इस विषय को लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।
पांच सूत्री मांग पत्र में क्या शामिल है
साझा संस्कृति मंच की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले पांच सूत्री मांग पत्र में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित विभिन्न मुद्दों को शामिल किया गया है। मंच ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही है। यह संगठन की ओर से रखी गई मांग है।
दूसरी मांग में एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता तथा पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करने की बात कही गई है। मंच का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में ऐसे प्रावधान और व्यवस्थाएं होनी चाहिए, जिनसे किसी पात्र नागरिक का नाम अनावश्यक रूप से सूची से बाहर न हो।
तीसरी मांग फॉर्म छह के माध्यम से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया से संबंधित है। मंच ने इस प्रक्रिया में किए गए कथित गैरकानूनी संशोधनों को वापस लेने और नियमों के अनुरूप नाम दर्ज कराने की व्यवस्था को सरल तथा पारदर्शी बनाने की मांग की है। हालांकि कथित संशोधनों की प्रकृति और उनकी वैधानिक स्थिति के बारे में मंच की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में विस्तृत दस्तावेज या आधिकारिक विवरण शामिल नहीं है।
चौथी मांग के तहत मंच ने वाराणसी जनपद में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की कुल संख्या सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही विधानसभा क्षेत्रवार विस्तृत आंकड़े जारी करने की बात कही गई है। मंच का कहना है कि आंकड़ों की उपलब्धता से मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्थिति स्पष्ट होगी और नागरिकों को संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।
पांचवीं मांग में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से प्रभावित प्रत्येक नागरिक को लिखित सूचना देने की बात कही गई है। मंच चाहता है कि सूचना में नाम हटाने का स्पष्ट कारण, संबंधित निर्णय का विवरण, आपत्ति या अपील की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और नाम दोबारा जुड़वाने की समय सीमा का उल्लेख किया जाए। संगठन के अनुसार ऐसी व्यवस्था से प्रभावित नागरिकों को अपनी स्थिति समझने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन पर दिया जोर
साझा संस्कृति मंच ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन लोकतंत्र की आधारशिला है। मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंच ने निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के तहत संचालित होनी चाहिए।
मंच की ओर से राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया गया है कि मांग पत्र में उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित निर्णयों की स्पष्ट जानकारी और शिकायतों के समाधान की प्रभावी व्यवस्था से नागरिकों का निर्वाचन प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में विभिन्न लोगों की रही सहभागिता
इस कार्यक्रम में साझा संस्कृति मंच से जुड़े धनञ्जय त्रिपाठी, जागृति राही, अनूप श्रमिक, सतीश सिंह, रामजन्म यादव, अधिवक्ता मुन्ना राय, रवि शेखर, एकता शेखर, नीति, मुकेश उपाध्याय, सानिया, मनीष, बबलू, अमन, जावेद माजिद, कल्याण, अहमद, किरन सिंह, गुड्डी देवी, अनामिका, अखिलेश यादव, किरण, वंदना, दीपांशी, अमन पिंकला, शकुंतला, गुड्डी, अंजली और नंदा शास्त्री सहित अन्य लोग शामिल रहे। उपस्थित लोगों ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, पात्र नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और निर्वाचन प्रक्रिया में जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
साझा संस्कृति मंच की ओर से उठाए गए इन मुद्दों पर अब राष्ट्रपति के नाम प्रस्तावित मांग पत्र के माध्यम से संबंधित पक्षों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा। मंच ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और पात्र नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई है।
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