गंगा पार रामनगर में कथित खुलेआम बिक्री को लेकर भी उठे सवाल, स्थानीय नागरिकों ने संयुक्त अभियान चलाने की मांग की
वाराणसी/रामनगर: प्रतिबंधित चीनी मांझे की अवैध बिक्री और भंडारण के खिलाफ वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस की कार्रवाई के बीच जैतपुरा थाना क्षेत्र में बड़ी बरामदगी का मामला सामने आया है। पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, चौकाघाट इलाके में कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। उसके कब्जे से 31 किलो 200 ग्राम प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। वहीं, दूसरी ओर गंगा पार रामनगर क्षेत्र में भी प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझे की कथित बिक्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इस कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने और संबंधित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की मांग की जा रही है।
चौकाघाट में कार्रवाई, 31 किलो 200 ग्राम मांझा बरामद
पुलिस से प्राप्त विवरण के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान 23 वर्षीय प्रीतम कुमार मौर्या पुत्र पवन कुमार मौर्या के रूप में हुई है। वह जैतपुरा थाना क्षेत्र के देलवरिया का निवासी बताया गया है। 13 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4:15 बजे चौकाघाट में टाटा कंपनी के समीप संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई की। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से कुल 31.200 किलोग्राम प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद होने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब इस मामले में बरामद सामग्री के स्रोत और उसकी संभावित आपूर्ति से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। हालांकि, बरामद मांझे की बिक्री के लिए किन लोगों से संपर्क किया गया था या इसकी आपूर्ति कहां की जानी थी, इस संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चल रहा अभियान
पुलिस के अनुसार, प्रतिबंधित चीनी मांझे की अवैध बिक्री और भंडारण पर रोक लगाने के लिए कमिश्नरेट स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे मांझे के इस्तेमाल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना और आम नागरिकों के साथ पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया है कि यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त के निर्देश, पुलिस उपायुक्त काशी जोन के निर्देशन तथा अपर पुलिस उपायुक्त काशी जोन के पर्यवेक्षण में की गई। सहायक पुलिस आयुक्त चेतगंज और जैतपुरा थाना प्रभारी के नेतृत्व में संबंधित टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
इस कार्रवाई में चौकाघाट चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक संदीप कुमार सिंह के साथ कांस्टेबल मंगला प्रसाद, रजनीश कुमार गुप्ता और सुदीश कुमार शर्मा की भूमिका बताई गई है। पुलिस की इस कार्रवाई को प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और भंडारण पर अंकुश लगाने के अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, किसी एक स्थान से बरामदगी के आधार पर पूरे नेटवर्क के विस्तार या उसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में निष्कर्ष निकालना जांच पूरी होने के बाद ही उचित होगा।
जैतपुरा थाने में मुकदमा दर्ज
उपलब्ध पुलिस विवरण के अनुसार, इस मामले में जैतपुरा थाने में मुकदमा अपराध संख्या 225/2026 दर्ज किया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 293, 125 और 223 तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5/15 के तहत अभियोग पंजीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस और जांच से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर की जाएगी। मुकदमे में दर्ज धाराओं और आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जाएगा।
रामनगर में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री को लेकर उठे सवाल
जैतपुरा में पुलिस कार्रवाई के बीच गंगा पार रामनगर क्षेत्र में प्रतिबंधित चीनी मांझे की कथित बिक्री को लेकर भी चर्चा हो रही है। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का दावा है कि रामनगर के कई बाजारों और संकरी गलियों में सिंथेटिक मांझे की बिक्री की जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित स्थानों पर पुलिस की ओर से की गई किसी विशिष्ट कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन आरोपों को जांच के दायरे में आने वाला विषय माना जाना चाहिए। यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री हो रही है, तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ कार्रवाई केवल शहर के कुछ हिस्सों तक सीमित न रह जाए। लोगों की मांग है कि रामनगर सहित उन सभी इलाकों में नियमित जांच और निगरानी की जाए, जहां इस तरह के मांझे की बिक्री की आशंका है। हालांकि, रामनगर में किसी संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने या उसे किसी स्तर से संरक्षण मिलने के आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी है। बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या संस्था पर इस तरह का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
जानलेवा मांझे पर रोक के लिए व्यापक निगरानी जरूरी
प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझे को लेकर चिंता का प्रमुख कारण इससे होने वाली संभावित गंभीर दुर्घटनाएं हैं। दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों के लिए सड़क पर लटकता या गिरा हुआ मांझा जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अलावा, पक्षियों के घायल होने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में केवल बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि भंडारण, आपूर्ति और इस्तेमाल पर भी नियमानुसार निगरानी जरूरी है। दुकानदारों और पतंगबाजी के शौकीनों को भी प्रतिबंधित मांझे से दूर रहने तथा सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल करने की जरूरत है।
जैतपुरा में हुई बरामदगी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की जांच में मांझे की आपूर्ति से जुड़े अन्य तथ्यों का पता चलता है या नहीं। साथ ही, रामनगर में प्रतिबंधित मांझे की कथित बिक्री के संबंध में उठाए जा रहे सवालों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। गंगा के दोनों किनारों पर प्रभावी निगरानी, शिकायतों की जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई से ही प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर अंकुश लगाने के प्रयासों को व्यापक बनाया जा सकता है।
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