बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए लंबे समय बाद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 23 वर्षों के इंतजार के बाद अब राज्य में नियोजित शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ मिलने जा रहा है। इसके लिए न्यूनतम 12 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में डीपीओ स्थापना की ओर से सभी नियोजन इकाइयों को पत्र भेजा गया है, जिससे शिक्षकों में खुशी का माहौल है।
यह प्रोन्नति पंचायत, प्रखंड, नगर निगम, नगर परिषद और जिला परिषद नियोजन इकाइयों के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों को दी जाएगी। अर्हता पूरी करने वाले शिक्षकों को अगले वेतनमान में प्रोन्नति मिलेगी। डीपीओ स्थापना इंद्र कुमार कर्ण द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पात्र शिक्षकों की सूची एक पखवाड़े के भीतर संबंधित बीईओ को उपलब्ध करानी होगी, ताकि आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
जिला शिक्षा विभाग के इस निर्णय पर शिक्षकों और शिक्षक संगठनों ने संतोष जताया है। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष जितेंद्र कुमार यादव सहित कई पदाधिकारियों और शिक्षकों ने इसे वर्षों की मांग पूरी होने वाला कदम बताया है। शिक्षकों का कहना है कि इस फैसले से मनोबल बढ़ेगा और कार्य के प्रति नई ऊर्जा मिलेगी।
इसी बीच शिक्षा विभाग ने फरवरी माह में आयोजित होने वाली परीक्षाओं को देखते हुए सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट और मैट्रिक परीक्षाओं के शांतिपूर्ण और कदाचार मुक्त संचालन के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षक और कर्मचारियों की छुट्टियां रद कर दी गई हैं।
जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि इस अवधि में केवल सरकार द्वारा घोषित अवकाश ही मान्य होंगे। प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी या डीपीओ स्तर से किसी भी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। विशेष परिस्थिति में ही जिला शिक्षा कार्यालय में गठित समिति की अनुशंसा पर अवकाश दिया जा सकेगा।
गौरतलब है कि इंटरमीडिएट की परीक्षा 2 फरवरी से और मैट्रिक की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होने वाली है। शिक्षा विभाग का मानना है कि सख्त व्यवस्था से परीक्षाओं का संचालन व्यवस्थित और निष्पक्ष रूप से किया जा सकेगा। एक ओर जहां प्रोन्नति की
