वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत डेगरुपुर गांव में गुरुवार को एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई, जब सरकारी आदेश के अनुपालन में अतिक्रमण संबंधी नोटिस देने पहुंचे लेखपाल पर गांव के कुछ लोगों ने हमला कर दिया। यह घटना दोपहर करीब बारह बजे की बताई जा रही है। रौना कला के लेखपाल सतीश यादव तहसील दिवस और आईजीआरएस प्रार्थना पत्र की जांच के साथ साथ तहसीलदार न्यायिक सदर वाराणसी द्वारा जारी आदेश के तहत नोटिस तामील कराने डेगरुपुर गांव पहुंचे थे। सरकारी कार्य के दौरान हुए इस हमले से न केवल प्रशासनिक अमले में आक्रोश है बल्कि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
लेखपाल सतीश यादव के अनुसार वह रघुनाथ पुत्र मग्गू को अतिक्रमण से संबंधित नोटिस देने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि अतिक्रमणकारी रघुनाथ यादव और उसके परिवार के सदस्य चंद्रभूषण रमेश बृजेश अजीत प्रदीप सहित दो से तीन अज्ञात लोगों ने एकजुट होकर उनके साथ गाली गलौज शुरू कर दी और फिर मारपीट पर उतर आए। अचानक हुए इस हमले से लेखपाल खुद को संभाल भी नहीं पाए। आरोपियों ने न केवल उनके साथ शारीरिक मारपीट की बल्कि उनके पास मौजूद महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज भी छीन लिए।
हमलावरों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सरकारी अभिलेख नजरी नक्शा और नोटिस को फाड़कर फेंक दिया और लेखपाल को दोबारा गांव में दिखाई देने पर जान से मारने तथा नौकरी नहीं करने देने की धमकी दी। इस पूरी घटना से गांव में कुछ देर के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। सरकारी कर्मचारी पर खुलेआम हमला और सरकारी कागजात को नुकसान पहुंचाने की घटना को प्रशासनिक कार्य में सीधा हस्तक्षेप माना जा रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के अन्य लेखपालों में रोष फैल गया। सरकारी कर्मचारी पर हमले को गंभीर मानते हुए लगभग बीस लेखपाल एकजुट होकर चौबेपुर थाने पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी को लिखित तहरीर सौंपते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। लेखपालों का कहना था कि यदि सरकारी आदेश का पालन कराने गए कर्मचारियों पर इस तरह हमले होंगे तो भविष्य में प्रशासनिक कार्य करना बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अतिक्रमण हटाने और राजस्व से जुड़े मामलों में पहले ही दबाव रहता है और अब जान का खतरा भी पैदा हो गया है।
चौबेपुर थाना अध्यक्ष इंद्रेश कुमार ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। घायल लेखपाल सतीश यादव का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया गया है ताकि चोटों का विधिक रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना प्रशासनिक अमले के लिए चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस तरह की घटनाओं पर सख्ती नहीं की गई तो अतिक्रमण और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। डेगरुपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फील्ड में काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती दिखाई जाती है।
