अमेठी जनपद के शिवरतनगंज डाकघर में बड़े वित्तीय गबन का मामला सामने आया है। जांच में तत्कालीन कार्यवाहक उपडाकपाल जितेंद्र कुमार तिवारी पर इकतीस लाख रुपये से अधिक की धनराशि के गबन का आरोप सिद्ध होता दिख रहा है। विभागीय मिलान में वास्तविक नकदी और सिस्टम के आंकड़ों में भारी अंतर पाए जाने के बाद डाक विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले ने जमाकर्ताओं में चिंता बढ़ा दी है और अन्य तैनाती स्थलों पर भी अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
रायबरेली मंडल के अंतर्गत महराजगंज डाकघर के डाक निरीक्षक Hridesh Mishra के अनुसार शिवरतनगंज में तैनाती के दौरान वर्ष दो हजार अठारह से दो हजार बाईस की अवधि में अब तक की जांच में इकतीस लाख पचासी हजार रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। विभाग आरोपित उपडाकपाल के विरुद्ध गबन का मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। डाक विभाग का कहना है कि विस्तृत ऑडिट के बाद जहां जहां गबन की पुष्टि होगी वहां विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इससे पहले रायबरेली जनपद के हरदोई डाकघर में सामने आए बड़े गबन से भी जुड़ा हुआ है। वहां तैनाती के दौरान भी जितेंद्र कुमार तिवारी पर पचास लाख सोलह हजार रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था जो गहन जांच के बाद बढ़कर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का पाया गया। इस प्रकरण में पिछले वर्ष अगस्त में बछरावां कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और विभाग ने आरोपित को निलंबित कर दिया था।
जांच में यह भी सामने आया है कि मूल रूप से डाक सहायक पद पर तैनात रहते हुए उपडाकपाल का प्रभार संभालने के दौरान आरोपित ने विभाग को गुमराह कर लंबे समय तक अनियमितताएं छिपाए रखीं। जब हरदोई डाकघर में देनदारी का मिलान हुआ तब जालसाजी का खुलासा हुआ। इसके बाद विभाग ने अन्य तैनाती स्थलों के लेनदेन की जांच शुरू की तो कई और अनियमितताओं के संकेत मिले।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार आरोपित इससे पहले सेमरौता और जायस में भी तैनात रह चुका है। जायस में रहते हुए वह प्रतिनियुक्ति पर शिवगढ़ और हलोर डाकघरों में भी कार्यरत रहा। शिवरतनगंज में गबन की पुष्टि के बाद जायस और सेमरौता सहित अन्य स्थानों पर भी हेराफेरी की आशंका को लेकर जांच जारी है।
रायबरेली डाक मंडल के अधीक्षक Anup Kumar Agrawal ने कहा कि जहां जहां गबन की पुष्टि होगी वहां मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिवरतनगंज थानाध्यक्ष Dayashankar Mishra ने बताया कि डाक विभाग से प्राप्त सूचना के आधार पर जांच चल रही है और जांच पूरी होते ही विधिक कार्रवाई की जाएगी। डाक विभाग का कहना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए जांच को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।
