वाराणसी नगर निगम में भाजपा की ताकत और मजबूत, शासन ने 10 पार्षद किए मनोनीत
वाराणसी: काशी की नगर राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग ने वाराणसी नगर निगम में दस पार्षदों को मनोनीत करने की अधिसूचना जारी कर दी है। 14 मार्च 2026 को जारी इस आदेश में राज्यपाल की ओर से उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 6 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन नामों को नगर निगम वाराणसी में पार्षद के रूप में नामित किया गया है। इस निर्णय को नगर निगम की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे निगम में सत्तारूढ़ पक्ष की संख्या और प्रभाव दोनों मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
शासन ने जारी की मनोनीत पार्षदों की सूची
नगर विकास अनुभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार शासन ने जिन दस लोगों को पार्षद के रूप में मनोनीत किया है, उनमें कमलेश पाल, रमाशंकर सिंह पटेल, संजीव चौरसिया, संतोष शेला पुरकर, मनोज यादव, कृष्ण कुमार उर्फ किशन कन्नौजिया, अंकुर महरोत्रा, मुन्ना सरोज, सत्यनारायण साहनी और सुधीर कुमार त्रिपाठी के नाम शामिल हैं। शासन के आदेश के साथ जारी सूची में इन सभी का पूरा पता और पारिवारिक विवरण भी दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि इनका संबंध वाराणसी शहर के अलग अलग क्षेत्रों से है और इन्हें स्थानीय सामाजिक सक्रियता तथा जनभागीदारी के आधार पर नगर निगम में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
अधिसूचना के अनुसार कमलेश पाल कंदवा क्षेत्र से जुड़े हैं, जबकि रमाशंकर सिंह पटेल भगवानपुर लंका क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं। संजीव चौरसिया का संबंध लंका की साकेत कॉलोनी से है। इसी प्रकार संतोष शेला पुरकर ब्रह्मा घाट क्षेत्र से, मनोज यादव राज मंदिर क्षेत्र से और कृष्ण कुमार उर्फ किशन कन्नौजिया बिरदुपुर इलाके से जुड़े हैं। इसके अलावा अंकुर महरोत्रा कर्णघंटा क्षेत्र से, मुन्ना सरोज चंदुआ छित्तूपुर सिगरा इलाके से, सत्यनारायण साहनी अगसकुंडा क्षेत्र से तथा सुधीर कुमार त्रिपाठी प्रह्लाद घाट क्षेत्र से आते हैं।
नगर निगम की कार्यप्रणाली में निभाएंगे अहम भूमिका
नगर निगम की व्यवस्था में मनोनीत पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ये सदस्य नगर प्रशासन, विकास योजनाओं और विभिन्न समितियों में अपनी भागीदारी निभाते हुए नगर निगम के कामकाज में सहयोग करते हैं। शासन द्वारा ऐसे लोगों को नामित किया जाता है जिनकी समाज सेवा, सार्वजनिक जीवन या स्थानीय मुद्दों की समझ बेहतर मानी जाती है। माना जा रहा है कि इन नए नामों के जुड़ने से नगर निगम की कार्यप्रणाली में नए सुझाव और स्थानीय अनुभव शामिल होंगे, जिससे विकास योजनाओं को और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
राजनीतिक असर भी दिखने की चर्चा
नगर निगम से जुड़े राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मनोनयन की इस प्रक्रिया का राजनीतिक असर भी दिखाई देगा। वाराणसी नगर निगम पहले से ही भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है और इन मनोनीत पार्षदों के आने से निगम में सत्तारूढ़ दल की ताकत और मजबूत होने की चर्चा है। इससे नगर निगम की स्थायी समितियों, विकास प्रस्तावों और बजट से जुड़े फैसलों में भी असर देखने को मिल सकता है।
इस आदेश के अंत में प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। इसके साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यह मनोनयन उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत किया गया है। काशी की राजनीति और नगर प्रशासन में यह फैसला आने वाले समय में कई स्तरों पर प्रभाव डाल सकता है। नगर निगम के भीतर नई जिम्मेदारियों के साथ ये मनोनीत पार्षद शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, यातायात, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाते नजर आएंगे।
काशी जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में नगर निगम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शासन द्वारा किए गए इन मनोनयनों को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि शहर के प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह भी देखा जाएगा कि ये नए पार्षद नगर निगम के मंच पर किस तरह शहर के मुद्दों को उठाते हैं और वाराणसी के विकास की दिशा में क्या नई पहल करते हैं।
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