अहमदाबाद में रेडी टू ईट डोसा बैटर से दो मासूमों की मौत
गुजरात: अहमदाबाद शहर के चांदखेड़ा इलाके से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साधारण खाद्य सामग्री माने जाने वाले रेडी टू ईट डोसा बैटर के सेवन के बाद एक ही परिवार की दो मासूम बच्चियों की मौत हो गई। तीन महीने और साढ़े तीन साल की सगी बहनों की इस संदिग्ध मौत से पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है बल्कि खुले में बिकने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और निगरानी पर भी बहस तेज कर दी है।
डोसा बैटर खाने के बाद बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार यह मामला एक अप्रैल से जुड़ा है जब परिवार ने चांदखेड़ा स्थित एक डेयरी से डोसा बनाने का बैटर खरीदा था। परिजनों का कहना है कि उसी बैटर से तैयार डोसा खाने के बाद सबसे पहले घर के मुखिया की तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उस समय परिवार को यह अंदाजा नहीं था कि उनकी परेशानी की वजह बाजार से खरीदा गया खाद्य पदार्थ हो सकता है।
अगले दिन बढ़ी स्थिति की गंभीरता
परिजनों के अनुसार अगले दिन मां और उनकी साढ़े तीन साल की बेटी ने भी वही डोसा खाया। घर की तीन महीने की बच्ची जो केवल मां के दूध पर निर्भर थी वह भी इस संक्रमण की चपेट में आ गई। कुछ ही घंटों के भीतर तीनों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इलाज के दौरान तीन महीने की बच्ची की मौत हो गई जबकि बड़ी बहन ने भी अगले दिन दम तोड़ दिया। एक ही परिवार में दो बच्चों की इस तरह मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
जांच के लिए टीम सक्रिय
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने संबंधित डेयरी पर पहुंचकर बैटर और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला फूड प्वाइजनिंग का है या फिर खाद्य पदार्थ के संरक्षण और निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है।
डेयरी प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार
इस पूरे मामले में डेयरी प्रबंधन ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वे प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बैटर बेचते हैं और अब तक किसी अन्य ग्राहक से इस तरह की शिकायत सामने नहीं आई है। प्रबंधन ने सीसीटीवी फुटेज और ग्राहकों के फीडबैक का हवाला देते हुए अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर भरोसा जताया है। हालांकि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।
खाद्य सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री कितनी सुरक्षित है। खासकर खुले में बिकने वाले और बिना उचित पैकेजिंग के उत्पादों को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों के निर्माण और भंडारण में थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
वाराणसी जैसे शहरों के लिए भी चेतावनी
यह घटना केवल अहमदाबाद तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक चेतावनी है। वाराणसी जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भी बड़ी संख्या में डेयरी और फूड स्टॉल संचालित हो रहे हैं जहां नियमित जांच और लाइसेंस व्यवस्था पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो इस तरह की घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और आगे की राह
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए नियमित निरीक्षण, लाइसेंस की जांच और मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही आम नागरिकों को भी जागरूक रहकर केवल विश्वसनीय स्थानों से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं जो इस दुखद घटना के पीछे की असली वजह को सामने लाएगी।
दो मासूमों की असमय मौत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही की कीमत बहुत भारी हो सकती है। ऐसे में यह जरूरी है कि इस मामले से सबक लेकर व्यवस्था को और सख्त बनाया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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