छेदा पासी को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की मांग, अजय राय ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी छेदा पासी और उनके नौ साथियों को आधिकारिक रूप से स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की मांग उठाई है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अन्याय को सुधारने की आवश्यकता पर जोर देते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
ब्रिटिश कालीन शिलालेख बदलने की भी मांग
अजय राय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि लखनऊ स्थित छेदा पासी के स्मारक पर लगे शिलालेख में अब भी ब्रिटिश शासन द्वारा लिखे गए अपमानजनक और भ्रामक शब्द मौजूद हैं। उन्होंने मांग की है कि इन शब्दों को हटाकर उनकी जगह सम्मानजनक और सत्यपरक विवरण अंकित कराया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास की जानकारी मिल सके।
पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि छेदा पासी और उनके साथियों के जीवन संघर्ष, बलिदान और देशभक्ति को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम के कम चर्चित लेकिन महत्वपूर्ण नायकों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
पैतृक गांव के विकास की मांग
अजय राय ने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि छेदा पासी के पैतृक गांव और उसके आसपास के क्षेत्र का समग्र विकास कराया जाए। उनका मानना है कि इससे न केवल उस क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान को भी नई पहचान मिलेगी।
भारत छोड़ो आंदोलन में निभाई थी अहम भूमिका
गौरतलब है कि बड़ा चांदगंज, कपूरथला निवासी छेदा पासी ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अपने साथियों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत किया।
अंग्रेजों ने दी थी क्रूर सजा
30 मार्च 1944 को ब्रिटिश शासन ने छेदा पासी और उनके नौ साथियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें बेहद क्रूर तरीके से तोप के गोले से उड़ाकर मौत के घाट उतार दिया गया। उस समय अंग्रेजों ने उन्हें डकैत और हत्यारा घोषित कर उनके बलिदान को बदनाम करने का प्रयास किया था।
इतिहास में न्याय की मांग
अजय राय का कहना है कि अब समय आ गया है कि ऐसे वीर सपूतों को उनका उचित सम्मान दिया जाए और इतिहास में उनके योगदान को सही स्थान मिले। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी।
यह मांग न केवल एक व्यक्ति के सम्मान से जुड़ी है, बल्कि उन सभी गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान का प्रश्न है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
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