Fri, 29 Aug 2025 08:04:08 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA
मथुरा: उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और सख्त छवि के लिए चर्चित आईपीएस अधिकारी प्रशांत कुमार ने रिटायरमेंट के बाद अब आध्यात्मिक यात्रा की ओर कदम बढ़ाया है। गुरुवार को वे अपने परिवार के साथ मथुरा पहुंचे और संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डिंपल वर्मा और बेटी भी साथ रहीं।
आश्रम 'केलि कुंज' में हुई इस संक्षिप्त लेकिन विशेष मुलाकात के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने पूर्व डीजीपी को जीवन का गूढ़ संदेश देते हुए कहा कि उन्होंने अब तक समाज और राष्ट्र की सेवा पूरी निष्ठा से की है। रिटायरमेंट के बाद अब उन्हें ईश्वर का स्मरण करते हुए अपने कर्मों से ऐसा आदर्श स्थापित करना चाहिए कि अगले जन्म में भी उन्हें मनुष्य योनि प्राप्त हो। महाराज ने कहा, "मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि जब यह शरीर छूटे तो वह भगवान की स्मृति में छूटे।"
इस दौरान डिंपल वर्मा ने भी संत से संवाद किया। उन्होंने कहा कि परिवार और बेटी की जिम्मेदारियां अभी भी उनके सामने हैं। जिस पर संत प्रेमानंद ने उत्तर दिया, "परिवार की सेवा ही भगवान की सेवा है। इसे ईश्वर की भक्ति मानकर पूरा करिए, तभी जीवन का अर्थ सार्थक होगा।" दो मिनट से अधिक समय तक चली इस मुलाकात में प्रशांत कुमार और उनका परिवार हाथ जोड़कर खड़े रहे और विनम्रता से संत की शिक्षाओं को आत्मसात किया।
बताते चलें कि 31 मई 2025 को प्रशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक पद से सेवानिवृत्ति ली थी। कठोर, निष्पक्ष और कानून व्यवस्था पर कड़ी पकड़ रखने वाले अधिकारी के रूप में उनकी गिनती होती रही है। रिटायरमेंट के बाद अब वे परिवार संग धार्मिक यात्राओं में समय बिता रहे हैं। गुरुवार को वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के बाद वे संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रशांत कुमार का जन्म बिहार के सीवान जिले में हुआ था। पढ़ाई के दिनों से ही वे मेधावी छात्र रहे। उन्होंने एमएससी, एमफिल और एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होकर तमिलनाडु कैडर जॉइन किया। वर्ष 1994 में यूपी कैडर की आईएएस अधिकारी डिंपल वर्मा से विवाह के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर में स्थानांतरण लिया और फिर यहीं रहते हुए अपने करियर की नई पहचान बनाई।
तीन दशक की सेवा के दौरान प्रशांत कुमार ने अपराध और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर खुद को एक निडर और परिणाममुखी अधिकारी के रूप में स्थापित किया। अब रिटायरमेंट के बाद वे धार्मिक आस्था और पारिवारिक दायित्वों के बीच नया संतुलन साधते दिख रहे हैं।