वाराणसी: पूर्व सैनिकों के सम्मान पर रार, स्टेशन हेडक्वार्टर पर पक्षपात का आरोप

वाराणसी में इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन ने स्टेशन हेडक्वार्टर पर पूर्व सैनिकों से पक्षपात व उपेक्षा का आरोप लगाया।

Tue, 13 Jan 2026 20:53:02 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

वाराणसी: देश की सीमाओं पर जान की बाजी लगाने वाले पूर्व सैनिकों के बीच अब अपने ही विभाग में सम्मान और हक की लड़ाई छिड़ गई है। वाराणसी में सक्रिय और भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ‘इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन’ (Indian Veterans Organization) ने स्टेशन हेडक्वार्टर 39 जीटीसी (39 GTC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने सैन्य प्रशासन पर सीधे तौर पर "पिक एंड चूज" यानी पक्षपात करने और एक विशेष गुट को बढ़ावा देते हुए बाकी पूर्व सैनिकों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया है। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, क्योंकि संगठन का दावा है कि उन्हें जानबूझकर महत्वपूर्ण सैन्य कार्यक्रमों और वेलफेयर से जुड़ी सूचनाओं से दूर रखा जा रहा है।

साजिश या संयोग? कार्यक्रमों से लगातार बेदखली
इस विवाद की मुख्य वजह हाल ही में आयोजित हुए सैन्य कार्यक्रम बने हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि 14 जनवरी को 'वेटरन्स डे' (Veterans Day) जैसे गौरवपूर्ण अवसर पर भी उन्हें दरकिनार कर दिया गया। इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन का आरोप है कि उन्होंने स्टेशन हेडक्वार्टर 39 जीटीसी को पहले ही लिखित रूप में अपनी उपस्थिति और सहभागिता के लिए सूचित किया था, इसके बावजूद वहां केवल एक ही संगठन विशेष के 10 से 20 लोगों को बुलाया गया और अन्य संगठनों को स्पष्ट रूप से मना कर दिया गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; इससे पूर्व ‘कारगिल विजय दिवस’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम की भी कोई सूचना इस संगठन को नहीं दी गई थी। संगठन का कहना है कि जब देश सेवा सबने बराबर की है, तो रिटायरमेंट के बाद यह भेदभाव क्यों?

सैकड़ों पूर्व सैनिकों और कारगिल योद्धाओं की अनदेखी
स्टेशन हेडक्वार्टर द्वारा जिस संगठन की अनदेखी का आरोप लग रहा है, वह कोई छोटा-मोटा समूह नहीं है। इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन भारत सरकार (रजिस्ट्रेशन नं. 366/2020) और नीति आयोग (रजिस्ट्रेशन नं. 0494287/2025) के तहत पूरी तरह से पंजीकृत संस्था है। वाराणसी जनपद में ही इस संगठन से 400 से अधिक भूतपूर्व सैनिक जुड़े हुए हैं। इनमें कारगिल युद्ध के हीरो रहे अजय कुमार सिंह जैसे वरिष्ठ और सम्मानित सैनिक भी शामिल हैं, जो संगठन की साख को बयां करते हैं। संगठन का कहना है कि वे निरंतर पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के कल्याण के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं, फिर भी आधिकारिक पत्राचार और वेलफेयर मीटिंग्स में उन्हें ब्लैकआउट किया जा रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी और 'एकतरफा प्रेम' पर सवाल
संगठन के जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश सिंह और उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार पांडेय ने इस भेदभाव के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है। उनका दावा है कि उन्होंने न केवल स्टेशन हेडक्वार्टर को पत्र लिखे, बल्कि जिला सैनिक बोर्ड के अधिकारी ग्रुप कैप्टन अशोक पांडेय से भी 3 से 4 बार व्यक्तिगत मुलाकात की। इन मुलाकातों में उन्होंने साफ तौर पर अनुरोध किया था कि सूचनाएं साझा की जाएं और सभी संगठनों को समान अवसर मिले। लेकिन आरोप है कि प्रशासन का झुकाव केवल एक अन्य ESM संगठन और उसके अध्यक्ष राजबली पाल की तरफ है। आरोप है कि हर सरकारी कार्यक्रम में केवल उसी एक संगठन से नाम मांगे जाते हैं, जो कि समान अधिकार के संवैधानिक और सैन्य सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है।

समानता की मांग और बढ़ता आक्रोश
इस पूरे प्रकरण ने वाराणसी के पूर्व सैनिक समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। इंडियन वेटरन्स ऑर्गेनाइजेशन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांग स्पष्ट है।सेना का अनुशासन 'समानता' पर टिका होता है, इसलिए पूर्व सैनिकों के संगठनों के साथ व्यवहार में भी वही समानता दिखनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि वेलफेयर से जुड़ी हर सूचना पारदर्शी तरीके से सभी तक पहुंचे और भविष्य में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में सभी संगठनों की सम्मानजनक और बराबर की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह होगा कि स्टेशन हेडक्वार्टर और जिला सैनिक बोर्ड इस असंतोष को थामने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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