वाराणसी: लोलार्क षष्ठी पर संतान प्राप्ति की कामना के साथ लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

वाराणसी के लोलार्क कुंड में लोलार्क षष्ठी पर संतान प्राप्ति की कामना से देशभर से आए हजारों दंपतियों और श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।

Fri, 29 Aug 2025 07:47:42 - By : SANDEEP KR SRIVASTAVA

वाराणसी: संतान प्राप्ति की कामना और आस्था की शक्ति से परिपूर्ण लोलार्क षष्ठी पर इस बार काशी का माहौल पूरी तरह भक्ति से सराबोर हो गया। गुरुवार की मध्यरात्रि से ही लोलार्क कुंड में श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। देशभर से आए हजारों दंपति और श्रद्धालु 22 घंटे के इंतजार के बाद आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। स्नान से पहले 51 डमरुओं की गूंज के साथ विशेष आरती संपन्न हुई, जिसके बाद श्रद्धालुओं के जत्थों को कुंड की ओर बढ़ाया गया।

इस अवसर पर बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, नेपाल सहित विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में दंपति पहुंचे। संतान की प्राप्ति की प्रबल कामना और शारीरिक कष्टों से मुक्ति की आस्था लेकर श्रद्धालु देर रात से कतारों में खड़े रहे। स्नान का सिलसिला शुक्रवार की सुबह तक जारी रहने की संभावना है। अनुमान है कि इस बार करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालु लोलार्क कुंड और उसके आसपास उमड़े हैं।

वाराणसी के असि क्षेत्र में स्थित यह कुंड अपनी विशेष मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। करीब 50 फीट गहरा और 15 फीट चौड़ा यह कुंड एक खड़े कुएं से जुड़ा है, जिसमें तीन दिशाओं से उतरने की सीढ़ियां बनी हैं। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यहां स्नान करने से निसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस पवित्र जल में स्नान के लिए आते हैं।

पौराणिक मान्यता के अनुसार लोलार्क षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड में स्नान और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा से भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं और संतान की कामना पूरी करते हैं। दंपति तीन बार डुबकी लगाने के बाद कुंड में फल या सब्जी का दान करते हैं और अपने भीगे कपड़े वहीं छोड़ देते हैं। आस्था है कि जिस वस्तु का दान किया जाता है, उसकी मनोकामना पूरी होने तक सेवन नहीं करना चाहिए।

काशीखंड में उल्लेख है कि काशी के सभी तीर्थों में लोलार्क कुंड का स्थान सर्वोपरि है। शास्त्रों के अनुसार "सर्वेषां काशितीर्थानां लोलार्कः प्रथमं शिरः" यानी काशी के सभी तीर्थों में लोलार्क को प्रथम स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि यहां स्नान-दान का अलग महत्व माना जाता है।

भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं। पांच किलोमीटर के दायरे तक बैरिकेडिंग लगाई गई है और श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। देर रात से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाला। डीसीपी काशी ने स्वयं मौके पर पहुंचकर व्यवस्था की कमान संभाली। पुलिस एक ही मार्ग से श्रद्धालुओं को स्नान के लिए भेज रही है, जिससे भीड़ नियंत्रण में रहे और अव्यवस्था की स्थिति न बने।

लोलार्क षष्ठी का यह पर्व न केवल काशी की धार्मिक परंपरा को उजागर करता है, बल्कि संतान की आकांक्षा रखने वाले दंपतियों के लिए आशा और विश्वास की अनोखी डोर भी बन जाता है। भक्ति और आस्था की इस गहरी परंपरा में डुबकी लगाने के लिए आने वाले श्रद्धालु आज भी मानते हैं कि लोलार्क कुंड का स्नान जीवन की सबसे बड़ी प्राप्तियों में से एक है।

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