काशी में इंसानियत की मिसाल, श्री काल भैरव डॉग अनाथालय बेसहारा कुत्तों का सहारा

वाराणसी का श्री काल भैरव डॉग अनाथालय बेसहारा, घायल व उपेक्षित कुत्तों को आधुनिक सुविधाओं संग मानवीय देखभाल प्रदान कर रहा है।

Sun, 30 Nov 2025 12:52:26 - By : Palak Yadav

काशी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ अब इंसानियत और करुणा की मिसाल भी पेश कर रहा है। वाराणसी के हरहुआ क्षेत्र में स्थित श्री काल भैरव डॉग अनाथालय बेसहारा, घायल और उपेक्षित कुत्तों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बना हुआ है। लगभग एक बीघा भूमि पर फैला यह अनाथालय वर्तमान में करीब दो सौ कुत्तों की देखभाल कर रहा है। इनमें वे कुत्ते भी शामिल हैं जिन्हें मालिकों ने छोड़ दिया या जो सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से घायल हो गए थे।

अनाथालय में कुत्तों की देखभाल के लिए आधुनिक और हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां छोटा ICU बनाया गया है, जहां गंभीर रूप से घायल कुत्तों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा समर्पित कुत्ता एंबुलेंस और हर समय सक्रिय रेस्क्यू टीम भी मौजूद रहती है। रेस्क्यू के बाद कुत्तों की चिकित्सा, भोजन व्यवस्था और दैनिक देखभाल की जिम्मेदारी दस सदस्यीय टीम और चिकित्सकों की देखरेख में होती है। टीम यह सुनिश्चित करती है कि हर कुत्ते को समय पर इलाज, पोषण और स्वच्छ वातावरण मिल सके।

अनाथालय की सबसे अनोखी विशेषता इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है। यहां जब भी कोई नया कुत्ता लाया जाता है, उसकी आरती उतारी जाती है और माथे पर चंदन लगाया जाता है। कुत्ते के स्वभाव और व्यवहार के आधार पर उसे नया नाम भी दिया जाता है। यह परंपरा अनाथालय की पहचान बन चुकी है और यहां दया और सम्मान के साथ हर जीव का स्वागत किया जाता है।

नियमित समय पर भोजन, साफ सफाई और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था होती है। कई कुत्ते यहां आने के बाद स्वस्थ होकर नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं। अनाथालय की संस्थापक और संचालक सुदेशना बासु और सीईओ दिलीप सेन गुप्ता का कहना है कि यह प्रयास केवल सेवा नहीं बल्कि समाज को संवेदनशीलता का संदेश देने की कोशिश है। उनका मानना है कि इंसान जिस तरह प्रेम और देखभाल पाता है, उसी तरह जानवरों को भी संरक्षण और स्नेह की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि अनाथालय देखने आने वाले पर्यटकों को भी कुत्ते बहुत पसंद आते हैं। कई कुत्तों को विदेशों में नए घर भी मिल चुके हैं। वह कहती हैं कि हर जीव महत्वपूर्ण है और मनुष्यों की तरह पशुओं की सेवा भी समान रूप से आवश्यक है।

हरहुआ का यह अनाथालय काशी की उस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है जिसमें जीव मात्र के प्रति करुणा और सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। यह न केवल कुत्तों को नया जीवन देता है, बल्कि समाज में पशु सेवा के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है।

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