अयोध्या जिला कारागार से दो विचाराधीन कैदियों के फरार होने के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर महानिदेशक कारागार पीसी मीना ने वरिष्ठ अधीक्षक जेल उदय प्रताप मिश्र, जेलर जितेंद्र कुमार यादव और उप कारापाल मयंक त्रिपाठी को निलंबित कर दिया है।
इसके अलावा हेड जेल वार्डर हरिहर प्रसाद, त्रिपुरारी मिश्र तथा जेल वार्डर सुरेश कुमार दुबे, जय प्रकाश यादव, सुनील कुमार, रमेश सहानी, रवि यादव और मनोज को भी निलंबित किया गया है। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
महानिदेशक कारागार के अनुसार, इस प्रकरण की प्रारंभिक जांच उप महानिरीक्षक कारागार अयोध्या परिक्षेत्र शैलेंद्र कुमार मैत्रेय द्वारा की गई थी। जांच रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में गंभीर चूक पाई गई, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
बताया गया कि अयोध्या जिला कारागार के विशेष सुरक्षा कक्ष प्रथम की कोठरी संख्या चार में दो विचाराधीन बंदी रखे गए थे। इनमें शेर अली पुत्र रफीक अली, निवासी अमरेमऊ सुलतानपुर, और गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरि पुत्र साधूराम, निवासी मुसाफिरखाना अमेठी शामिल हैं। शेर अली 28 नवंबर 2024 से और गोलू 14 सितंबर से जेल में निरुद्ध था।
दोनों बंदियों को 28 जनवरी की शाम को उनकी कोठरी में बंद किया गया था। 29 जनवरी की सुबह करीब छह से साढ़े छह बजे के बीच गिनती के दौरान कोठरी का ताला खोला गया, लेकिन पुकार लगाने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। जांच में पाया गया कि कोठरी के पीछे की दीवार में लगे जंगले के पास ईंटें निकली हुई थीं और दोनों बंदी कोठरी में मौजूद नहीं थे।
प्रारंभिक जांच में दोनों के कारागार से फरार होने की पुष्टि हुई है। मामले को गंभीर मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई है, जबकि फरार कैदियों की तलाश और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा जारी है।
