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अयोध्या बिजली विभाग में करोड़ों का घोटाला, विधायक की शिकायत पर मुख्य अभियंता हटाए गए

अयोध्या बिजली विभाग में करोड़ों का घोटाला, विधायक की शिकायत पर मुख्य अभियंता हटाए गए

अयोध्या बिजली विभाग में करोड़ों के वित्तीय घोटाले के आरोप में मुख्य अभियंता अशोक कुमार चौरसिया को पद से हटाकर पश्चिमांचल स्थानांतरित किया गया है।

अयोध्या: लंबे समय से बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर आखिरकार बड़ी कार्यवाही हुई है। भाजपा विधायक रामचंद्र यादव की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे गए पत्रों के बाद करोड़ों रुपये के वित्तीय घपले में फंसे मुख्य अभियंता (विद्युत) अशोक कुमार चौरसिया को तत्काल प्रभाव से अयोध्या परिक्षेत्र से हटा दिया गया है। सरकार ने उन्हें पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में स्थानांतरित कर दिया है। यह फैसला उस समय लिया गया जब अभियंता पर पहले से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हुए थे और संविदा कर्मी उनके खिलाफ लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे।

विधायक रामचंद्र यादव ने इसी माह मुख्यमंत्री को लगातार दो पत्र लिखकर बिजली विभाग में जमे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की थी। उन्होंने विशेष तौर पर अयोध्या में तीन दशकों से एक ही क्षेत्र में तैनात जूनियर इंजीनियर (जेई) और करोड़ों के गबन में फंसे मुख्य अभियंता को हटाने की गुहार लगाई थी। विधायक का कहना था कि इन अधिकारियों ने विभाग की छवि को धूमिल किया है और इनके खिलाफ न केवल स्थानांतरण बल्कि आर्थिक वसूली और दंडात्मक कार्रवाई भी जरूरी है।

मुख्य अभियंता अशोक कुमार चौरसिया पर पहले भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि नानपारा, कैसरगंज और भिनगा में तैनाती के दौरान उन पर एक करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप था। हालांकि उस समय बिना वसूली किए उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया था। विधायक यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में इस मामले का उल्लेख करते हुए स्पष्ट कहा कि इतनी बड़ी रकम की वसूली किए बिना उन्हें क्लीन चिट देना अन्यायपूर्ण है और उनकी भूमिका पर संदेह को और गहरा करता है।

मुख्य अभियंता के साथ-साथ अयोध्या में लंबे समय से तैनात जेई नरेश जायसवाल पर भी सवाल उठे हैं। विधायक ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2003 से लगातार एक ही क्षेत्र में तैनाती का लाभ उठाकर उन्होंने अपार संपत्ति अर्जित की है। उन पर स्टोर से निकली सामग्री के दुरुपयोग, पैतृक गांव में सरकारी खर्च पर लाइन खिंचवाने, और जमीन की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त के आरोप हैं। यहां तक कि उन्होंने निराला नगर और चौक क्षेत्र में डबल स्टोरी मकान और वाणिज्यिक भवन तक खड़े कर लिए हैं। इन संपत्तियों के जरिए वे अपने परिवार के नाम पर सोलर एजेंसी भी चला रहे हैं और उपभोक्ताओं को वहीं से खरीदारी के लिए बाध्य कर रहे हैं।

विधायक के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जेई नरेश जायसवाल के भ्रष्टाचार में मुख्य अभियंता अशोक कुमार चौरसिया की भी सीधी साझेदारी रही है। आरोप है कि चौरसिया ने खुद पत्र लिखकर यह सुनिश्चित किया कि जायसवाल का तबादला न हो, जबकि विभाग की अन्य महिला कर्मचारियों का मनमाने तरीके से स्थानांतरण कर दिया गया। इससे यह साफ हो गया कि विभाग के भीतर एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र चल रहा था, जिसमें बड़े अधिकारी से लेकर स्थानीय कर्मचारी तक शामिल थे।

विधायक रामचंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इन दोनों अधिकारियों, मुख्य अभियंता अशोक कुमार चौरसिया और जेई नरेश जायसवाल की संपत्तियों की टैक्स और सतर्कता जांच (TAC जांच) कराई जाए। साथ ही, इनके खिलाफ वित्तीय गबन की वसूली सुनिश्चित करते हुए दंडात्मक कार्रवाई भी की जाए ताकि भविष्य में विभागीय अधिकारियों को भ्रष्टाचार का संरक्षण न मिल सके।

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